Jeremiah · chapter 51 · verse 15
Jeremiah 51:15 in Hindi
उसी ने पृथ्वी को अपने सामर्थ से बनाया, और जगत को अपनी बुद्वि से स्थिर किया; और आकाश को अपनी प्रवीणता से तान दिया है।
Usee ne pruthvee ko apane saamarth se banaayaa, aur jagat ko apanee budvi se sthir kiyaa; aur aakaash ko apanee praveenataa se taan diyaa hai.
Jeremiah 51:15 in English
- King James Version (KJV)
- He hath made the earth by his power, he hath established the world by his wisdom, and hath stretched out the heaven by his understanding.
- World English Bible (WEB)
- “He has made the earth by his power. He has established the world by his wisdom. By his understanding he has stretched out the heavens.
- American Standard Version (ASV)
- He hath made the earth by his power, he hath established the world by his wisdom, and by his understanding hath he stretched out the heavens.
- Bible in Basic English (BBE)
- He has made the earth by his power, he has made the world strong in its place by his wisdom, and by his wise design the heavens have been stretched out:
- Darby Translation (DBY)
- He hath made the earth by his power, he hath established the world by his wisdom, and hath stretched out the heavens by his understanding.
- Webster's Bible (WBS)
- He hath made the earth by his power, he hath established the world by his wisdom, and hath stretched out the heaven by his understanding.
- Young's Literal Translation (YLT)
- The maker of earth by His power, The establisher of the world by His wisdom, Who by His understanding stretched out the heavens,
Read in context
- 13हे बहुत जलाशयों के बीच बसी हुई और बहुत भण्डार रखनेवाली, तेरा अन्त आ गया, तेरे लोभ की सीमा पहंच गई है।
- 14सेनाओं के यहोवा ने अपनी ही शपथ खाई है, कि निश्चय मैं तुझ को टिडि्डयों के समान अनगिनित मनुष्यों से भर दूंगा, और वे तेरे विरूद्व ललकारेंगे।
- 15उसी ने पृथ्वी को अपने सामर्थ से बनाया, और जगत को अपनी बुद्वि से स्थिर किया; और आकाश को अपनी प्रवीणता से तान दिया है।
- 16जब वह बोलता है तब आकाश में जल का बड़ा शब्द होता है, वह पृथ्वी की छोर से कुहरा उठाता है। वह वर्षा के लिये बिजली बनाता, और अपने भण्डार में से पवन निकाल ले आता है।
- 17सब मनुष्य पशु सरीखे ज्ञानरहित है; सब सोनारों को अपनी खोदी हुई मूरतों के कारण लज्जित होना पड़ेगा; क्योंकि उनकी ढाली हुई मूरतें धोखा देनेवाली हैं, और उनके कुछ भी सांस नहीं चलती।
Cross references
- Revelation 4:11 प्रकाशितवाक्य 4:11कि हमारे प्रभु, और परमेश्वर, तू ही महिमा, और आदर, और सामर्थ के योग्य है; क्योंकि तू ही ने सब वस्तुएं सृजीं और वे तेरी ही इच्छा से थी, और सृजी गईं।।
- Jeremiah 10:12–16 यिर्मयाह 10:12–16उसी ने पृथ्वी को अपनी सामर्थ से बनाया, उस ने जगत को अपनी बुध्दि से स्थिर किया, और आकाश को अपनी प्रवीणता से तान दिया है। जब वह बोलता है तब आकाश में जल का बड़ा शब्द होता है, और पृथ्वी की छोर से वह कुहरे को उठाता है। वह वर्षा के लिये बिजली चमकाता, और अपने भणडार में से पवन चलाता है। सब मनुष्य पशु सरीखे ज्ञानरहित हैं; अपनी खोदी हुई मूरतों के कारण सब सुनारों की आशा टूटती है; क्योंकि उनकी ढाली हुई मूरतें झूठी हैं, और उन में सांस ही नहीं है। वे व्यर्थ और ठट्ठे ही के योग्य हैं; जब उनके दण्ड का समय आएगा तब वे नाश हो जाएंगीं। परन्तु याकूब का निज भाग उनके समान नहीं है, क्योंकि वह तो सब का सृजनहार है, और इस्राएल उसके निज भाग का गोत्रा है; सेनाओं का यहोवा उसका नाम है।
- Jeremiah 32:17 यिर्मयाह 32:17हे प्रभु यहोवा, तू ने बड़े सामर्थ और बढ़ाई हुई भुजा से आकाश और पृथ्वी को बनाया है! तेरे लिये कोई काम कठिन नहीं है।
- Colossians 1:16–17 कुलुस्सियों 1:16–17क्योंकि उसी में सारी वस्तुओं की सृष्टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। और वही सब वस्तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।
- Acts 14:15 प्रेरितों के काम 14:15हम भी तो तुम्हारे समान दु:ख- सुख भोगी मनुष्य हैं, और तुम्हें सुसमाचार सुनाते हैं, कि तुम इन व्यर्थ वस्तुओं से अलग होकर जीवते परमेश्वर की ओर फिरो, जिस ने स्वर्ग और पृथ्वी और समुद्र और जो कुछ उन में है बनाया।
- Romans 1:20 रोमियों 1:20क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात् उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरूत्तर हैं।
- Proverbs 3:19 नीतिवचन 3:19यहोवा ने पृथ्वी की नेव बुद्धि ही से डाली; और स्वर्ग को समझ ही के द्वारा स्थिर किया।
- Job 9:8 अय्यूब 9:8वह आकाशमणडल को अकेला ही फैलाता है, और समुद्र की ऊंची ऊंची लहरों पर चलता है;
- Psalm 148:1–5 भजन संहिता 148:1–5याह की स्तुति करो! यहोवा की स्तुति स्वर्ग में से करो, उसकी स्तुति ऊंचे स्थानों में करो! हे उसके सब दूतों, उसकी स्तुति करो: हे उसकी सब सेना उसकी स्तुति कर! हे सूर्य और चन्द्रमा उसकी स्तुति करो, हे सब ज्योतिमय तारागण उसकी स्तुति करो! हे सब से ऊंचे आकाश, और हे आकाश के ऊपरवाले जल, तुम दोनों उसकी स्तुति करो। वे यहोवा के नाम की स्तुति करें, क्योंकि उसी ने आज्ञा दी और ये सिरजे गए।
- Hebrews 1:2–3 इब्रानियों 1:2–3इन दिनों के अन्त में हम से पुत्रा के द्वारा बातें की, जिसे उस ने सारी वस्तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उस ने सारी सृष्टि रची है। वह उस की महिमा का प्रकाश, और उसके तत्व की छाप है, और सब वस्तुओं को अपनी सामर्थ के वचन से संभालता है: वह पापों को धोकर ऊंचे स्थानों पर महामहिमन के दहिने जा बैठा।
- Isaiah 40:22 यशायाह 40:22यह वह है जो पृथ्वी के घेरे के ऊपर आकाशमण्डल पर विराजमान है; और पृथ्वी के रहनेवाले टिड्डी के तुल्य है; जो आकाश को मलमल की नाईं फैलाता और ऐसा तान देता है जैसा रहने के लिये तम्बू ताना जाता है;
- Psalm 136:5 भजन संहिता 136:5उस ने अपनी बुद्धि से आकाश बनाया, उसकी करूणा सदा की है।