Jeremiah · chapter 51 · verse 16
Jeremiah 51:16 in Hindi
जब वह बोलता है तब आकाश में जल का बड़ा शब्द होता है, वह पृथ्वी की छोर से कुहरा उठाता है। वह वर्षा के लिये बिजली बनाता, और अपने भण्डार में से पवन निकाल ले आता है।
Jab vah bolataa hai tab aakaash mem jal kaa badaa shabd hotaa hai, vah pruthvee kee chhor se kuharaa uthaataa hai. Vah varshaa ke liye bijalee banaataa, aur apane bhandaar mem se pavan nikaal le aataa hai.
Jeremiah 51:16 in English
- King James Version (KJV)
- When he uttereth [his] voice, [there is] a multitude of waters in the heavens; and he causeth the vapours to ascend from the ends of the earth: he maketh lightnings with rain, and bringeth forth the wind out of his treasures.
- World English Bible (WEB)
- When he utters his voice, there is a roar of waters in the heavens, and he causes the vapors to ascend from the ends of the earth. He makes lightning for the rain, and brings the wind out of his treasuries.
- American Standard Version (ASV)
- When he uttereth his voice, there is a tumult of waters in the heavens, and he causeth the vapors to ascend from the ends of the earth; he maketh lightnings for the rain, and bringeth forth the wind out of his treasuries.
- Bible in Basic English (BBE)
- At the sound of his voice there is a massing of the waters in the heavens, and he makes the mists go up from the ends of the earth; he makes the thunder-flames for the rain and sends out the wind from his store-houses.
- Darby Translation (DBY)
- When he uttereth his voice, there is a tumult of waters in the heavens, and he causeth the vapours to ascend from the end of the earth; he maketh lightnings for the rain, and bringeth forth the wind out of his treasures.
- Webster's Bible (WBS)
- When he uttereth [his] voice, [there is] a multitude of waters in the heavens; and he causeth the vapors to ascend from the ends of the earth: he maketh lightnings with rain, and bringeth forth the wind out of his treasures.
- Young's Literal Translation (YLT)
- At the voice He giveth forth, A multitude of waters [are] in the heavens, And He causeth vapours to come up from the end of the earth, Lightnings for rain He hath made, And He bringeth out wind from His treasures.
Read in context
- 14सेनाओं के यहोवा ने अपनी ही शपथ खाई है, कि निश्चय मैं तुझ को टिडि्डयों के समान अनगिनित मनुष्यों से भर दूंगा, और वे तेरे विरूद्व ललकारेंगे।
- 15उसी ने पृथ्वी को अपने सामर्थ से बनाया, और जगत को अपनी बुद्वि से स्थिर किया; और आकाश को अपनी प्रवीणता से तान दिया है।
- 16जब वह बोलता है तब आकाश में जल का बड़ा शब्द होता है, वह पृथ्वी की छोर से कुहरा उठाता है। वह वर्षा के लिये बिजली बनाता, और अपने भण्डार में से पवन निकाल ले आता है।
- 17सब मनुष्य पशु सरीखे ज्ञानरहित है; सब सोनारों को अपनी खोदी हुई मूरतों के कारण लज्जित होना पड़ेगा; क्योंकि उनकी ढाली हुई मूरतें धोखा देनेवाली हैं, और उनके कुछ भी सांस नहीं चलती।
- 18वे तो व्यर्थ और ठट्ठे ही के योग्य है; जब उनके नाश किए जाने का समय आएगा, तब वे नाश ही होंगी।
Cross references
- Psalm 135:7 भजन संहिता 135:7वह पृथ्वी की छोर से कुहरे उठाता है, और वर्षा के लिये बिजली बनाता है, और पवन को अपने भण्डार में से निकालता है।
- Jonah 1:4 योना 1:4तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आंधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आंधी उठी, यहां तक कि जहाज टूटने पर था।
- Psalm 18:13 भजन संहिता 18:13तब यहोवा आकाश में गरजा, और परमप्रधान ने अपनी वाणी सुनाई, ओले ओर अंगारे।।
- Jeremiah 10:12–13 यिर्मयाह 10:12–13उसी ने पृथ्वी को अपनी सामर्थ से बनाया, उस ने जगत को अपनी बुध्दि से स्थिर किया, और आकाश को अपनी प्रवीणता से तान दिया है। जब वह बोलता है तब आकाश में जल का बड़ा शब्द होता है, और पृथ्वी की छोर से वह कुहरे को उठाता है। वह वर्षा के लिये बिजली चमकाता, और अपने भणडार में से पवन चलाता है।
- Job 36:26–33 अय्यूब 36:26–33देख, ईश्वर महान और हमारे ज्ञान से कहीं परे है, और उसके वर्ष की गिनती अनन्त है। क्योंकि वह तो जल की बूंदें ऊपर को खींच लेता है वे कुहरे से मेंह होकर टपकती हैं, वे ऊंचे ऊंचे बादल उंडेलते हैं और मनुष्यों के ऊपर बहुतायत से बरसाते हैं। फिर क्या कोई बादलों का फैलना और उसके मणडल में का गरजना समझ सकता है? देख, वह अपने उजियाले को चहुँओर फैलाता है, और समुद्र की थाह को ढांपता है। क्योंकि वह देश देश के लोगों का न्याय इन्हीं से करता है, और भोजनवस्तुएं बहुतायत से देता है। वह बिजली को अपने हाथ में लेकर उसे आज्ञा देता है कि दुश्मन पर गिरे। इसकी कड़क उसी का समाचार देती है पशु भी प्रगट करते हैं कि अन्धड़ चढ़ा आता है।
- Psalm 46:6 भजन संहिता 46:6जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
- Psalm 29:3–10 भजन संहिता 29:3–10यहोवा की वाणी मेघों के ऊपर सुन पड़ती है; प्रतामी ईश्वर गरजता है, यहोवा घने मेघों के ऊपर रहता है। यहोवा की वाणी शक्तिशाली है, यहोवा की वाणी प्रतापमय है। यहोवा की वाणी देवदारों को तोड़ डालती है; यहोवा लबानोन के देवदारों को भी तोड़ डालता है। वह उन्हें बछड़े की नाई और लबानोन और शिर्योन को जंगली बछड़े के समान उछालता है।। यहोवा की वाणी आग की लपटों को चीरती है। यहोवा की वाणी वन को हिला देती है, यहोवा कादेश के वन को भी कंपाता है।। यहोवा की वाणी से हरिणियों का गर्भपात हो जाता है। और अरण्य में पतझड़ होती है; और उसके मन्दिर में सब कोई महिमा ही महिमा बोलता रहता है।। जलप्रलय के समय यहोवा विराजमान था; और यहोवा सर्वदा के लिये राजा होकर विराजमान रहता है।
- Amos 9:7 आमोस 9:7हे इस्राएलियों, यहोवा की यह वाणी है, क्या तुम मेरे लेखे कूशियों के समान नहीं हो? क्या मैं इस्राएल को मि देश से और पलिश्तियों को कप्तोर से नहीं निकाल लाया? और अरामियों को कीर से नहीं निकाल लाया?
- Job 38:22 अय्यूब 38:22फिर क्या तू कभी हिम के भणडार में पैठा, वा कभी ओलों के भणडार को तू ने देखा है,
- Job 38:34–38 अय्यूब 38:34–38क्या तू बादलों तक अपनी वाणी पहुंचा सकता है ताकि बहुत जल बरस कर तुझे छिपा ले? क्या तू बिजली को आज्ञा दे सकता है, कि वह जाए, और तुझ से कहे, मैं उपस्थित हूँ? किस ने अन्तेकरण में बुध्दि उपजाई, और मन में समझने की शक्ति किस ने दी है? कौन बुध्दि से बादलों को गिन सकता है? और कौन आकाश के कुप्पों को उणडेल सकता है, जब धूलि जम जाती है, और ढेले एक दूसरे से सट जाते हैं?
- Job 37:2–11 अय्यूब 37:2–11उसके बोलने का शब्द तो सुनो, और उस शब्द को जो उसके मुंह से निकलता है सुनो। वह उसको सारे आकाश के तले, और अपनी बिजली को पृथ्वी की छोर तक भेजता है। उसके पीछे गरजने का शब्द होता है; वह अपने प्रतापी शब्द से गरजता है, और जब उसका शब्द सुनाई देता है तब बिजली लगातार चमकने लगती है। ईश्वर गरजकर अपना शब्द अदभ़ुत रीति से सुनाता है, और बड़े बड़े काम करता है जिनको हम नहीं समझते। वह तो हिम से कहता है, पृथ्वी पर गिर, और इसी प्रकार मेंह को भी और मूसलाधार वर्षा को भी ऐसी ही आज्ञा देता है। वह सब मनुष्यों के हाथ पर मुहर कर देता है, जिस से उसके बनाए हुए सब मनुष्य उसको पहचानें। तब वनपशु गुफाओं में घुस जाते, और अपनी अपनी मांदों में रहते हैं। दक्खिन दिशा से बवणडर और उतरहिया से जाड़ा आता है। ईश्वर की श्वास की फूंक से बरफ पड़ता है, तब जलाशयों का पाट जम जाता है। फिर वह घटाओं को भाफ़ से लादता, और अपनी बिजली से भरे हुए उजियाले का बादल दूर तक फैलाता है।
- Exodus 14:21 निर्गमन 14:21और मूसा ने अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ाया; और यहोवा ने रात भर प्रचण्ड पुरवाई चलाई, और समुद्र को दो भाग करके जल ऐसा हटा दिया, जिससे कि उसके बीच सूखी भूमि हो गई।
Original words (Hebrew)
- uttereth · H5414נָתַן nâthan
- voice · H6963קוֹל qôwl
- multitude · H1995הָמוֹן hâmôwn
- waters · H4325מַיִם mayim
- heavens · H8064שָׁמַיִם shâmayim
- vapours · H5387נָשִׂיא nâsîyʼ
- ascend · H5927עָלָה ʻâlâh
- ends · H7097קָצֶה qâtseh
- earth · H776אֶרֶץ ʼerets
- maketh · H6213עָשָׂה ʻâsâh
- lightnings · H1300בָּרָק bârâq
- rain · H4306מָטַר mâṭar
- forth · H3318יָצָא yâtsâʼ
- wind · H7307רוּחַ rûwach
- treasures · H214אוֹצָר ʼôwtsâr