Job · chapter 4 · verse 17
Job 4:17 in Hindi
क्या नाशमान मनुष्य ईश्वर से अधिक न्यायी होगा? क्या मनुष्य अपने सृजनहार से अधिक पवित्रा हो सकता है?
Kyaa naashamaan manushy eeshvar se adhik nyaayee hogaa? Kyaa manushy apane srujanahaar se adhik pavitraa ho sakataa hai?
Job 4:17 in English
- King James Version (KJV)
- Shall mortal man be more just than God? shall a man be more pure than his maker?
- World English Bible (WEB)
- ‘Shall mortal man be more just than God? Shall a man be more pure than his Maker?
- American Standard Version (ASV)
- Shall mortal man be more just than God? Shall a man be more pure than his Maker?
- Bible in Basic English (BBE)
- May a man be upright before God? or a man be clean before his Maker?
- Darby Translation (DBY)
- Shall [mortal] man be more just than God? Shall a man be purer than his Maker?
- Webster's Bible (WBS)
- Shall mortal man be more just than God? shall a man be more pure than his maker?
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'Is mortal man than God more righteous? Than his Maker is a man cleaner?
Read in context
- 15तब एक आत्मा मेरे साम्हने से होकर चली; और मेरी देह के रोएं खड़े हो गए।
- 16वह चुपचाप ठहर गई और मैं उसकी आकृति को पहिचान न सका। परन्तु मेरी आंखों के साम्हने कोई रूप था; पहिले सन्नाटा छाया रहा, फिर मुझे एक शब्द सुन पड़ा,
- 17क्या नाशमान मनुष्य ईश्वर से अधिक न्यायी होगा? क्या मनुष्य अपने सृजनहार से अधिक पवित्रा हो सकता है?
- 18देख, वह अपने सेवकों पर भरोसा नहीं रखता, और अपने स्वर्गदूतों को मूर्ख ठहराता है;
- 19फिर जो मिट्टी के घरों में रहते हैं, और जिनकी नेव मिट्टी में डाली गई है, और जो पतंगे की नाई पिस जाते हैं, उनकी क्या गणना।
Cross references
- Job 9:2 अय्यूब 9:2मैं निश्चय जानता हूं, कि बात ऐसी ही है; परन्तु मनुष्य ईश्वर की दृष्टि में क्योंकर धम ठहर सकता है?
- Job 25:4 अय्यूब 25:4फिर मनुष्य ईश्वर की दृष्टि में धम क्योंकर ठहर सकता है? और जो स्त्री से उत्पन्न हुआ है वह क्योंकर निर्मल हो सकता है?
- Ecclesiastes 7:20 सभोपदेशक 7:20नि:सन्देह पृथ्वी पर कोई ऐसा धर्मी मनुष्य नहीं जो भलाई ही करे और जिस से पाप न हुआ हो।।
- Psalm 143:2 भजन संहिता 143:2और अपने दास से मुक मा न चला! क्योंकि कोई प्राणी तेरी दृष्टि में निर्दोष नहीं ठहर सकता।।
- Jeremiah 17:9 यिर्मयाह 17:9मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोख देनेवाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है?
- Romans 11:33 रोमियों 11:33आहा! परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गंभीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं!
- Revelation 4:8 प्रकाशितवाक्य 4:8और चारों प्राणियों के छ: छ: पंख हैं, और चारों ओर, और भीतर आंखे ही आंखे हैं; और वे रात दिन बिना विश्राम लिए यह कहते रहते हैं, कि पवित्रा, पवित्रा, पवित्रा प्रभु परमेश्वर, सर्वशक्तिमान, जो था, और जो है, और जो आनेवाला है।
- Jeremiah 12:1 यिर्मयाह 12:1हे यहोवा, यदि मैं तुझ से मुक़ मा लड़ूं, तौभी तू धम है; मुझे अपने साथ इस विषय पर वादविवाद करने दे। दुष्टों की चाल क्यों सफंल होती है? क्या कारण है कि विश्वासघाती बहुत सुख से रहते हैं?
- Job 40:8 अय्यूब 40:8क्या तू मेरा न्याय भी व्यर्थ ठहराएगा? क्या तू आप निदष ठहरने की मनसा से मुझ को दोषी ठहराएगा?
- Job 35:2 अय्यूब 35:2कि क्या तू इसे अपना हम समझता है? क्या तू दावा करता है कि तेरा धर्म ईश्वर के धर्म से अधिक है?
- Romans 9:20 रोमियों 9:20हे मनुष्य, भला तू कौन है, जो परमेश्वर का साम्हना करता है? क्या गढ़ी हुई वस्तु गढ़नेवाले से कह सकती है कि तू ने मुझे ऐसा क्यों बनाया है?
- Romans 2:5 रोमियों 2:5पर अपनी कठोरता और हठीले मन के अनुसार उसके क्रोध के दिन के लिये, जिस में परमेश्वर का सच्चा न्याय प्रगट होगा, अपने निमित्त क्रोध कमा रहा है।