Job · chapter 25 · verse 4
Job 25:4 in Hindi
फिर मनुष्य ईश्वर की दृष्टि में धम क्योंकर ठहर सकता है? और जो स्त्री से उत्पन्न हुआ है वह क्योंकर निर्मल हो सकता है?
Phir manushy eeshvar kee drushti mem dham kyonkar thahar sakataa hai? Aur jo stree se utpann huaa hai vah kyonkar nirmal ho sakataa hai?
Job 25:4 in English
- King James Version (KJV)
- How then can man be justified with God? or how can he be clean [that is] born of a woman?
- World English Bible (WEB)
- How then can man be just with God? Or how can he who is born of a woman be clean?
- American Standard Version (ASV)
- How then can man be just with God? Or how can he be clean that is born of a woman?
- Bible in Basic English (BBE)
- How then is it possible for man to be upright before God? or how may he be clean who is a son of woman?
- Darby Translation (DBY)
- And how should man be just with God? Or how should he be clean that is born of a woman?
- Webster's Bible (WBS)
- How then can man be justified with God? or how can he be clean [that is] born of a woman?
- Young's Literal Translation (YLT)
- And what? is man righteous with God? And what? is he pure — born of a woman?
Read in context
- 2प्रभुता करना और डराना यह उसी का काम है; वह अपने ऊंचे ऊंचे स्थानों में शान्ति रखता है।
- 3क्या उसकी सेनाओं की गिनती हो सकती? और कौन है जिस पर उसका प्रकाश नहीं पड़ता?
- 4फिर मनुष्य ईश्वर की दृष्टि में धम क्योंकर ठहर सकता है? और जो स्त्री से उत्पन्न हुआ है वह क्योंकर निर्मल हो सकता है?
- 5देख, उसकी दृष्टि में चन्द्रमा भी अन्धेरा ठहरता, और तारे भी निर्मल नहीं ठहरते।
- 6फिर मनुष्य की क्या गिनती जो कीड़ा है, और आदमी कहां रहा जो केंचुआ है!
Cross references
- Romans 5:1 रोमियों 5:1से जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें।
- Psalm 130:3 भजन संहिता 130:3हे याह, यदि तू अधर्म के कामों का लेखा ले, तो हे प्रभु कौन खड़ा रह सकेगा?
- Job 4:17–19 अय्यूब 4:17–19क्या नाशमान मनुष्य ईश्वर से अधिक न्यायी होगा? क्या मनुष्य अपने सृजनहार से अधिक पवित्रा हो सकता है? देख, वह अपने सेवकों पर भरोसा नहीं रखता, और अपने स्वर्गदूतों को मूर्ख ठहराता है; फिर जो मिट्टी के घरों में रहते हैं, और जिनकी नेव मिट्टी में डाली गई है, और जो पतंगे की नाई पिस जाते हैं, उनकी क्या गणना।
- Job 9:2 अय्यूब 9:2मैं निश्चय जानता हूं, कि बात ऐसी ही है; परन्तु मनुष्य ईश्वर की दृष्टि में क्योंकर धम ठहर सकता है?
- Job 15:14–16 अय्यूब 15:14–16मनुष्य है क्या कि वह निष्कलंक हो? और जो स्त्री से उत्पन्न हुआ वह है क्या कि निदष हो सके? देख, वह अपने पवित्रों पर भी विश्वास नहीं करता, और स्वर्ग भी उसकी दृष्टि में निर्मल नहीं है। फिर मनुष्य अधिक घिनौना और मलीन है जो कुटिलता को पानी की नाई पीता है।
- Psalm 143:2 भजन संहिता 143:2और अपने दास से मुक मा न चला! क्योंकि कोई प्राणी तेरी दृष्टि में निर्दोष नहीं ठहर सकता।।
- Revelation 1:5 प्रकाशितवाक्य 1:5और यीशु मसीह की ओर से, जो विश्वासयोग्य साक्षी और मरे हुओं में से जी उठनेवालों में पहिलौठा, और पृथ्वी के राजाओं का हाकिम है, तुम्हें अनुग्रह और शान्ति मिलती रहे: जो हम से प्रेम रखता है, और जिस ने अपने लोहू के द्वारा हमें पापों से छुड़ाया है।
- Psalm 51:5 भजन संहिता 51:5देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा।।
- Zechariah 13:1 जकर्याह 13:1उसी समय दाऊद के घराने और यरूशलेम के निवासियों के लिये पाप और मलिनता धोने के निमित्त एक बहता हुआ सोता होगा।।
- Job 14:3–4 अय्यूब 14:3–4फिर क्या तू ऐसे पर दृष्टि लगाता है? क्या तू मुझे अपने साथ कचहरी में घसीटता है? अशुठ्ठ वस्तु से शुठ्ठ वस्तु को कौन निकाल सकता है? कोई नहीं।
- 1 John 1:9 1 यूहन्ना 1:9यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है।
- Romans 3:19–20 रोमियों 3:19–20हम जानते हैं, कि व्यवस्था जो कुछ कहती है उन्हीं से कहती है, जो व्यवस्था के आधीन हैं: इसलिये कि हर एक मुंह बन्द किया जाए, और सारा संसार परमेश्वर के दण्ड के योग्य ठहरे। क्योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है।