Mark · chapter 14 · verse 49
Mark 14:49 in Hindi
मैं तो हर दिन मन्दिर में तुम्हारे साथ रहकर उपदेश दिया करता था, और तब तुम ने मुझे न पकड़ा: परन्तु यह इसलिये हुआ है कि पवित्रा शास्त्रा की बातें पूरी हों।
Maim to har din mandir mem tumhaare saath rahakar upadesh diyaa karataa thaa, aur tab tum ne mujhe na pakadaa: parantu yah isaliye huaa hai ki pavitraa shaastraa kee baatem pooree hon.
Mark 14:49 in English
- King James Version (KJV)
- I was daily with you in the temple teaching, and ye took me not: but the scriptures must be fulfilled.
- World English Bible (WEB)
- I was daily with you in the temple teaching, and you didn’t arrest me. But this is so that the Scriptures might be fulfilled.”
- American Standard Version (ASV)
- I was daily with you in the temple teaching, and ye took me not: but [this is done] that the scriptures might be fulfilled.
- Bible in Basic English (BBE)
- I was with you every day in the Temple teaching, and you did not take me; but this is done so that the Writings may come true.
- Darby Translation (DBY)
- I was daily with you teaching in the temple, and ye did not seize me; but [it is] that the scriptures may be fulfilled.
- Webster's Bible (WBS)
- I was daily with you in the temple, teaching, and ye took me not: but the scriptures must be fulfilled.
- Young's Literal Translation (YLT)
- daily I was with you in the temple teaching, and ye did not lay hold on me — but that the Writings may be fulfilled.'
Read in context
- 47उन में से जो पास खड़े थे, एक ने तलवार खींच कर महायाजक के दास पर चलाई, और उसका कान उड़ा दिया।
- 48यीशु ने उन से कहा; क्या तुम डाकू जानकर मेरे पकड़ने के लिये तलवारें और लाठियां लेकर निकले हो?
- 49मैं तो हर दिन मन्दिर में तुम्हारे साथ रहकर उपदेश दिया करता था, और तब तुम ने मुझे न पकड़ा: परन्तु यह इसलिये हुआ है कि पवित्रा शास्त्रा की बातें पूरी हों।
- 50इस पर सब चेले उसे छोड़कर भाग गए।।
- 51और एक जवान अपनी नंगी देह पर चादर ओढ़े हुए उसके पीदे हो लिया; और लोगों ने उसे पकड़ा।
Cross references
- John 18:20 यूहन्ना 18:20यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि मैं ने जागत से खोलकर बातें की; मैं ने सभाओं और आराधनालय में जहां सब यहूदी इकट्ठे हुआ करते हैं सदा उपदेश किया और गुप्त में कुछ भी नहीं कहा।
- John 8:2 यूहन्ना 8:2और भोर को फिर मन्दिर में आया, और सब लोग उसके पास आए; और वह बैठकर उन्हें उपदेश देने लगा।
- Mark 12:35 मरकुस 12:35फिर यीशु ने मन्दिर में उपदेश करते हुए यह कहा, कि शास्त्री क्योंकर कहते हैं, कि मसीह दाऊद का पुत्रा है?
- Matthew 1:22 मत्ती 1:22यह सब कुछ इसलिये हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था; वह पूरा हो।
- Daniel 9:24–26 दानिय्येल 9:24–26तेरे लोगों और तेरे पवित्रा नगर के लिये सत्तर सप्ताह ठहराए गए हैं कि उनके अन्त तक अपराध का होना बन्द हो, और पापों को अन्त और अधर्म का प्रायश्चित्त किया जाए, और युगयुग की धार्मिकता प्रगट होए; और दर्शन की बात पर और भविष्यवाणी पर छाप दी जाए, और परमपवित्रा का अभिषेक किया जाए। सो यह जान और समझ ले, कि यरूशलेम के फिर बसाने की आज्ञा के निकलने से लेकर अभिषिक्त प्रधान के समय तक सात सप्ताह बीतेंगे। फिर बासठ सप्ताहों के बीतने पर चौक और खाई समेत वह नगर कष्ट के समय में फिर बसाया जाएगा। और उन बासठ सप्ताहों के बीतने पर अभिषिक्त पुरूष काटा जाएगा: और उसके हाथ कुछ न लगेगा; और आनेवाले प्रधान की प्रजा नगर और पवित्रास्थान को नाश तो करेगी। परन्तु उस प्रधान का अन्त ऐसा होगा जैसा बाढ़ से होता है; तौभी उसके अन्त तक लड़ाई होती रहेगी; क्योंकि उसका उजड़ जाना निश्चय ठाना गया है।
- Luke 22:37 लूका 22:37क्योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि यह जो लिखा है, कि वह अपराधियों के साथ गिना गया, उसका मुझ में पूरा होना अवश्य है; क्योंकि मेरे विषय की बातें पूरी होन पर हैं।
- Matthew 26:56 मत्ती 26:56परन्तु यह सब इसलिये हुआ है, कि भविष्यद्वक्ताओं के वचन के पूरे हों: तब सब चेलें उसे छोड़कर भाग गए।।
- Matthew 26:54 मत्ती 26:54परन्तु पवित्रा शास्त्रा की बातें कि ऐसा ही होना अवश्य है, क्योंकर पूरी होंगी?
- Mark 11:15–18 मरकुस 11:15–18फिर वे यरूशलेम में आए, और वह मन्दिर में गया; और वहां जो लेन- देन कर रहे थे उन्हें बाहर निकालने लगा, और सर्राफों के पीढ़े और कबूतर के बेचनेवालों की चौकियां उलट दीं। और मन्दिर में से होकर किसी को बरतन लेकर आने जाने न दिया। और उपदेश करके उन से कहा, क्या यह नहीं लिखा है, कि मेरा घर सब जातियों के लिये प्रार्थना का घर कहलाएगा? पर तुम ने इसे डाकुओं की खोह बना दी है। यह सुनकर महायाजक और शास्त्री उसके नाश करने का अवसर ढूंढ़ने लगे; क्योंकि उस से डरते थे, इसलिये कि सब लोग उसके उपदेश से चकित होते थे।।
- Mark 11:27 मरकुस 11:27वे फिर यरूशलेम में आए, और जब वह मन्दिर में टहल रहा था तो महायाजक और शास्त्री और पुरनिए उसके पास आकर पूछने लगे।
- John 7:28–30 यूहन्ना 7:28–30तब यीशु ने मन्दिर में उपदेश देते हुए पुकार के कहा, तुम मुझे जानते हो और यह भी जानते हो कि मैं कहां का हूं: मैं तो आप से नहीं आया परन्तु मेरा भेजनेवाला सच्चा है, उस को तुम नहीं जानते। मैं उसे जानता हूं; क्योंकि मैं उस की ओर से हूं और उसी ने मुझे भेजा है। इस पर उन्हों ने उसे पकड़ना चाहा तौभी किसी ने उस पर हाथ न डाला, क्योंकि उसका समय अब तक न आया था।
- John 10:23 यूहन्ना 10:23और यीशु मन्दिर में सुलैमान के ओसारे में टहल रहा था।