Mark · chapter 4 · verse 33
Mark 4:33 in Hindi
और वह उन्हें इस प्रकार के बहुत से दृष्टान्त दे देकर उन की समझ के अनुसार वचन सुनाता था।
Aur vah unhem is prakaar ke bahut se drushtaant de dekar un kee samajh ke anusaar vachan sunaataa thaa.
Mark 4:33 in English
- King James Version (KJV)
- And with many such parables spake he the word unto them, as they were able to hear [it].
- World English Bible (WEB)
- With many such parables he spoke the word to them, as they were able to hear it.
- American Standard Version (ASV)
- And with many such parables spake he the word unto them, as they were able to hear it;
- Bible in Basic English (BBE)
- And with a number of such stories he gave them his teaching, as they were able to take it:
- Darby Translation (DBY)
- And with many such parables he spoke the word to them, as they were able to hear,
- Webster's Bible (WBS)
- And with many such parables he spoke the word to them, as they were able to hear [it] .
- Young's Literal Translation (YLT)
- And with many such similes he was speaking to them the word, as they were able to hear,
Read in context
- 31वह राई के दाने के समान हैं; कि जब भूमि में बोया जाता है तो भूमि के सब बीजों से छोटा होता है।
- 32परन्तु जब बोया गया, तो उगकर सब साग पात से बड़ा हो जाता है, और उसकी ऐसी बड़ी डालियां निकलती हैं, कि आकाश के पक्षी उसकी छाया में बसेरा कर सकते हैं।।
- 33और वह उन्हें इस प्रकार के बहुत से दृष्टान्त दे देकर उन की समझ के अनुसार वचन सुनाता था।
- 34और बिना दृष्टान्त कहे उन से कुछ भी नहीं कहता था; परन्तु एकान्त में वह अपने निज चेलों को सब बातों का अर्थ बताता था।।
- 35उसी दिन जब सांझ हुई, तो उस ने उन से कहा; आओ, हम पार चलें,।
Cross references
- Matthew 13:34–35 मत्ती 13:34–35ये सब बातें यीशु ने दृष्टान्तों में लोगों से कहीं, और बिना दृष्टान्त वह उन से कुछ न कहता था। कि जो वचन भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हो कि मैं दृष्टान्त कहने को अपना मुंह खोलूंगा: मैं उन बातों को जो जगत की उत्पत्ति से गुप्त रही हैं प्रगट करूंगा।।
- John 16:12 यूहन्ना 16:12मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते।
- 1 Corinthians 3:1–2 1 कुरिन्थियों 3:1–2हे भाइयों, मैं तुम से इस रीति से बातें न कर सका, जैसे आत्मिक लोगों से; परन्तु जैसे शारीरिक लोगों से, और उन से जो मसीह में बालक हैं। में ने तुम्हें दूध पिलाया, अन्न न खिलाया; क्योंकि तुम उस को न खा सकते थे; बारन अब तक भी नहीं खा सकते हो।
- Hebrews 5:11–14 इब्रानियों 5:11–14इस के विषय में हमें बहुत सी बातें कहनी हैं, जिन का समझना भी कठिन है; इसलिये कि तुम ऊंचा सुनने लगे हो। समय के विचार से तो तुम्हें गुरू हो जाना चाहिए था, तौभी क्या यह आवश्यक है, कि कोई तुम्हें परमेश्वर के वचनों की आदि शिक्षा फिर से सिखाए? ओर ऐसे हो गए हो, कि तुम्हें अन्न के बदले अब तक दूध ही चाहिए। क्योंकि दूध पीनेवाले बच्चे को तो धर्म के वचन की पहिचान नहीं होती, क्योंकि वह बालक है। पर अन्न सयानों के लिये है, जिन के ज्ञानेन्द्रिय अभ्यास करते करते, भले बुरे में भेद करने के लिये पक्के हो गए हैं।।