Mark · chapter 6 · verse 52
Mark 6:52 in Hindi
क्योंकि वे उन रोटियों के विषय में ने समझे थे परन्तु उन के मन कठोर हो गए थे।।
Kyonki ve un rotiyom ke vishay mem ne samajhe the parantu un ke man kathor ho gae the..
Mark 6:52 in English
- King James Version (KJV)
- For they considered not [the miracle] of the loaves: for their heart was hardened.
- World English Bible (WEB)
- for they hadn’t understood about the loaves, but their hearts were hardened.
- American Standard Version (ASV)
- for they understood not concerning the loaves, but their heart was hardened.
- Bible in Basic English (BBE)
- For it was not clear to them about the bread; but their hearts were hard.
- Darby Translation (DBY)
- for they understood not through the loaves: for their heart was hardened.
- Webster's Bible (WBS)
- For they considered not [the miracle] of the loaves; for their heart was hardened.
- Young's Literal Translation (YLT)
- for they understood not concerning the loaves, for their heart hath been hard.
Read in context
- 50पर उस ने तुरन्त उन से बातें कीं और कहा; ढाढ़स बान्धों: मैं हूं; डरो मत।
- 51तब वह उन के पास नाव पर आया, और हवा थम गई: वे बहुत ही आश्चर्य करने लगे।
- 52क्योंकि वे उन रोटियों के विषय में ने समझे थे परन्तु उन के मन कठोर हो गए थे।।
- 53और वे पार उतरकर गन्नेसरत में पहुंचे, और नाव घाअ पर लगाई।
- 54और जब वे नाव पर से उतरे, तो लोग तुरन्त उस को पहचान कर।
Cross references
- Mark 8:17–21 मरकुस 8:17–21यह जानकर यीशु ने उन से कहा; तुम क्यों आपस में विचार कर रहे हो कि हमारे पास रोटी नहीं? क्या अब तक नहीं जानते और नहीं समझते? क्या तुम्हारा मन कठोर हो गया है? क्या आंखे रखते हुए भी नहीं देखते, और कान रखते हुए भी नहीं सुनते? और तुम्हें स्मरण नहीं। कि जब मैं ने पांच हजार के लिये पांच रोटी तोड़ी थीं तो तुम ने टुकड़ों की कितनी टोकरियां भरकर उठाईं? उन्हों ने उस से कहा, सात टोकरे। उस ने उन से कहा, सात टोकरे। उस ने उन से कहा, क्या तुम अब तक नहीं समझते?
- Luke 24:25 लूका 24:25तब उस ने उन से कहा; हे निर्बुद्धियों, और भविष्यद्वक्ताओं की सब बातों पर विश्वास करने में मन्दमतियों!
- Isaiah 63:17 यशायाह 63:17हे यहोवा, तू क्यों हम को अपने मार्गों से भटका देता, और हमारे मन ऐसे कठोर करता है कि हम तेरा भय नहीं मानते? अपने दास, अपने निज भाग के गोत्रों के निमित्त लौट आ।
- Mark 16:14 मरकुस 16:14पीछे वह उन ग्यारहों को भी, जब वे भोजन करने बैठे थे दिखाई दिया, और उन के अविश्वास और मन की कठोरता पर उलाहना दिया, क्योंकि जिन्हों ने उसके जी उठने के बाद उसे देखा था, इन्होंने उन की प्रतीति न की थी।
- Matthew 16:9–11 मत्ती 16:9–11क्या तुम अब तक नहीं समझे? और उन पांच हजार की पांच रोटी स्मरण नहीं करते, और न यह कि कितनी टोकरियां उठाईं थीं? और न उन चार हजार की सात रोटी; और न यह कि कितने टोकरे उठाए गए थे? तुम क्यों नहीं समझते कि मैं ने तुम से रोटियों के विषय में नहीं कहा? फरीसियों और सदूकियों के खमीर से चौकस रहना।
- Mark 7:18 मरकुस 7:18उस ने उन से कहा; क्या तुम भी ऐसे ना समझ हो? क्या तुम नहीं समझते, कि जो वस्तु बाहर से मनुष्य के भीतर जाती है, वह उसे अशुद्ध नहीं कर सकती?
- Romans 11:7 रोमियों 11:7सो परिणाम क्या हुआ? यह कि इस्त्राएली जिस की खोज में हैं, वह उन को नहीं मिला; परन्तु चुने हुओं को मिला और शेष लोग कठोर किए गए हैं।
- Mark 3:5 मरकुस 3:5और उस ने उन के मन की कठोरता से उदास होकर, उन को क्रोध से चारों ओर देखा, और उस मनुष्य से कहा, अपना हाथ बढ़ा उस ने बढ़ाया, और उसका हाथ अच्छा हो गया।