Mark · chapter 8 · verse 4
Mark 8:4 in Hindi
उसके चेलों ने उस को उत्तर दिया, कि यहां जंगल में इतनी रोटी कोई कहां से लाए कि ये तृप्त हों?
Usake chelom ne us ko uttar diyaa, ki yahaam jangal mem itanee rotee koee kahaam se laae ki ye trupt hom?
Mark 8:4 in English
- King James Version (KJV)
- And his disciples answered him, From whence can a man satisfy these [men] with bread here in the wilderness?
- World English Bible (WEB)
- His disciples answered him, “From where could one satisfy these people with bread here in a deserted place?”
- American Standard Version (ASV)
- And his disciples answered him, Whence shall one be able to fill these men with bread here in a desert place?
- Bible in Basic English (BBE)
- And his disciples said in answer, How will it be possible to get enough bread for these men here in a waste place?
- Darby Translation (DBY)
- And his disciples answered him, Whence shall one be able to satisfy these with bread here in a desert place?
- Webster's Bible (WBS)
- And his disciples answered him, From whence can a man satisfy these [men] with bread here in the wilderness?
- Young's Literal Translation (YLT)
- And his disciples answered him, 'Whence shall any one be able these here to feed with bread in a wilderness?'
Read in context
- 2मुझे इस भीड़ पर तरस आता है, क्योंकि यह तीन दिन से बराबर मेरे साथ हैं, और उन के पास कुछ भी खाने को नहीं।
- 3यदि मैं उन्हें भूखा घर भेज दूं, तो मार्ग में थक कर रह जाएंगे; क्योकि इन में से कोई कोई दूर से आए हैं।
- 4उसके चेलों ने उस को उत्तर दिया, कि यहां जंगल में इतनी रोटी कोई कहां से लाए कि ये तृप्त हों?
- 5उस ने उन से पूछा; तुम्हारे पास कितनी रोटियां हैं? उन्हों ने कहा, सात।
- 6तब उस ने लोगों को भूमि पर बैठने की आज्ञा दी, और वे सात रोटियां लीं, और धन्यवाद करके तोड़ी, और अपने चेलों को देता गया कि उन के आगे रखें, और उन्हों ने लोगों के आगे परोस दिया
Cross references
- Mark 6:52 मरकुस 6:52क्योंकि वे उन रोटियों के विषय में ने समझे थे परन्तु उन के मन कठोर हो गए थे।।
- Matthew 15:33 मत्ती 15:33चेलों ने उस से कहा, हमें जंगल में कहां से इतनी रोटी मिलेगी कि हम इतनी बड़ी भीड़ को तृप्त करें?
- Psalm 78:19–20 भजन संहिता 78:19–20वे परमेश्वर के विरूद्ध बोले, और कहने लगे, क्या ईश्वर जंगल में मेज लगा सकता है? उस ने चट्टान पर मारके जल बहा तो दिया, और धाराएं उमण्ड़ चली, परन्तु क्या वह रोटी भी दे सकता है? क्या वह अपनी प्रजा के लिये मांस भी तैयार कर सकता?
- Mark 6:36–37 मरकुस 6:36–37उन्हें विदा कर, कि चारों ओर के गांवों और बस्तियों में जाकर, अपने लिये कुछ खाने को मोल लें। उस ने उन्हें उत्तर दिया; कि तुम ही उन्हें खाने को दो: उनहों ने उस से कहा; क्या हम सौ दीनार की रोटियां मोल लें, और उन्हें खिलाएं?
- 2 Kings 7:2 2 राजा 7:2तब उस सरदार ने जिसके हाथ पर राजा तकिया करता थ, परमेश्वर के भक्त को उत्तर देकर कहा, सुन, चाहे यहोवा आकाश के झरोखे खोले, तौभी क्या ऐसी बात हो सकेगी? उस ने कहा, सुन, तू यह अपनी आंखों से तो देखेगा, परन्तु उस अन्न में से कुछ खाने न पाएगा।
- John 6:7–9 यूहन्ना 6:7–9फिलिप्पुस ने उस को उत्तर दिया, कि दो सौ दीनार की रोटी उन के लिये पूरी भी न होंगी कि उन में से हर एक को थोड़ी थोड़ी मिल जाए। उसके चेलों में से शमौन पतरस के भाई अन्द्रियास ने उस से कहा। यहां एक लड़का है जिस के पास जव की पांच रोटी और दो मछलियां हैं परन्तु इतने लोगों के लिये वे क्या हैं।
- Numbers 11:21–23 गिनती 11:21–23फिर मूसा ने कहा, जिन लोगों के बीच मैं हूं उन में से छ: लाख तो प्यादे ही हैं; और तू ने कहा है, कि मैं उन्हें इतना मांस दूंगा, कि वे महीने भर उसे खाते ही रहेंगे। क्या वे सब भेड़- बकरी गाय- बैल उनके लिये मारे जाए, कि उनको मांस मिले? वा क्या समुद्र की सब मछलियां उनके लिये इकट्ठी की जाएं, कि उनको मांस मिले? यहोवा ने मूसा से कहा, क्या यहोवा का हाथ छोटा हो गया है? अब तू देखेगा, कि मेरा वचन जो मैं ने तुझ से कहा है वह पूरा होता है कि नहीं।
- 2 Kings 4:42–44 2 राजा 4:42–44और कोई पतुष्य बालशालीशा से, पहिले उपजे हुए जव की बीस रोटियां, और अपनी बोरी में हरी बालें परमेश्वर के भक्त के पास ले आया; तो एलीशा ने कहा, उन लोगों को खाने के लिये दे। उसके टहलुए ने कहा, क्या मैं सौ मनुष्यों के साम्हने इतना ही रख दूं? उस ने कहा, लोगों को दे दे कि खएं, क्योंकि यहोवा यों कहता है, उनके खाने के बाद कुछ बच भी जाएगा। तब उस ने उनके आगे धर दिया, और यहोवा के वचन के अनुसार उनके खाने के बाद कुछ बच भी गया।
Original words (Greek)
- And · G2532καί kaí
- his · G846αὐτός autós
- disciples · G3101μαθητής mathētḗs
- answered · G611ἀποκρίνομαι apokrínomai
- him · G846αὐτός autós
- whence · G4159πόθεν póthen
- can · G1410δύναμαι dýnamai
- man · G5100τὶς tìs
- satisfy · G5526χορτάζω chortázō
- these · G5128τούτους toútous
- bread · G740ἄρτος ártos
- here · G5602ὧδε hōde
- in · G1909ἐπί epí
- wilderness · G2047ἐρημία erēmía