Matthew · chapter 21 · verse 19
Matthew 21:19 in Hindi
और अंजीर के पेड़ सड़क के किनारे देखकर वह उसके पास गया, और पत्तों को छोड़ उस में और कुछ न पाकर उस से कहा, अब से तुझ में फिर कभी फल न लगे; और अंजीर का पेड़ तुरन्त सुख गया।
Aur anjeer ke ped sadak ke kinaare dekhakar vah usake paas gayaa, aur pattom ko chhod us mem aur kuchh na paakar us se kahaa, ab se tujh mem phir kabhee phal na lage; aur anjeer kaa ped turant sukh gayaa.
Matthew 21:19 in English
- King James Version (KJV)
- And when he saw a fig tree in the way, he came to it, and found nothing thereon, but leaves only, and said unto it, Let no fruit grow on thee henceforward for ever. And presently the fig tree withered away.
- World English Bible (WEB)
- Seeing a fig tree by the road, he came to it and found nothing on it but leaves. He said to it, “Let there be no fruit from you forever!” Immediately the fig tree withered away.
- American Standard Version (ASV)
- And seeing a fig tree by the way side, he came to it, and found nothing thereon, but leaves only; and he saith unto it, Let there be no fruit from thee henceforward for ever. And immediately the fig tree withered away.
- Bible in Basic English (BBE)
- And seeing a fig-tree by the wayside, he came to it, and saw nothing on it but leaves only; and he said to it, Let there be no fruit from you from this time forward for ever. And straight away the fig-tree became dry and dead.
- Darby Translation (DBY)
- And seeing one fig-tree in the way, he came to it and found on it nothing but leaves only. And he says to it, Let there be never more fruit of thee for ever. And the fig-tree was immediately dried up.
- Webster's Bible (WBS)
- And when he saw a fig-tree in the way, he came to it, and found nothing on it, but leaves only, and said to it, Let no fruit grow on thee henceforth for ever. And immediately the fig-tree withered.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and having seen a certain fig-tree on the way, he came to it, and found nothing in it except leaves only, and he saith to it, 'No more from thee may fruit be — to the age;' and forthwith the fig-tree withered.
Read in context
- 17तब वह उन्हें छोड़कर नगर के बाहर बैतनिरयाह को गया, ओर वहंा रात बिताई।।
- 18भोर को जब वह नगर को लौट रहा था, तो उसे भूख लगी।
- 19और अंजीर के पेड़ सड़क के किनारे देखकर वह उसके पास गया, और पत्तों को छोड़ उस में और कुछ न पाकर उस से कहा, अब से तुझ में फिर कभी फल न लगे; और अंजीर का पेड़ तुरन्त सुख गया।
- 20यह देखकर चेलों ने अचम्भा किया, और कहा, यह अंजीर का पेड़ क्योंकर तुरन्त सूख गया?
- 21यीशु ने उन को उत्तर दिया, कि मैं तुम से सच कहता हूं; यदि तुम विश्वास रखो, और सन्देह न करो; तो न केवल यह करोगे, जो इस अंजीर के पेड़ से किया गया है; परन्तु यदि इस पहाड़ से भी कहोगे, कि उखड़ जो; और समुद्र में जा पड़, तो यह हो जाएगा।
Cross references
- Mark 11:14 मरकुस 11:14इस पर उस ने उस से कहा अब से कोई तेरा फल कभी न खाए। और उसके चेले सुन रहे थे।
- John 15:6 यूहन्ना 15:6यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली की नाई फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं।
- Titus 1:16 तीतुस 1:16वे कहते हैं, कि हम परमेश्वर को जानते हैं: पर अपने कामों से उसका इन्कार करते हैं, क्योंकि वे घृणित और आज्ञा न माननेवाले हैं: और किसी अच्छे काम के योग्य नहीं।।
- Luke 3:9 लूका 3:9और अब ही कुल्हाड़ा पेड़ों की जड़ पर धरा है, इसलिये जो जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है।
- Luke 13:6–9 लूका 13:6–9फिर उस ने यह दृष्टान्त भी कहा, कि किसी की अंगूर की बारी में एक अंजीर का पेड़ लगा हुआ था: वह उस में फल ढूंढ़ने आया, परन्तु न पाया। तब उस ने बारी के रखवाले से कहा, देख तीन वर्ष से मैं इस अंजीर के पेड़ में फल ढूंढ़ने आता हूं, परन्तु नहीं पाता, इसे काट डाल कि यह भूमि को भी क्यों रोके रहे। उस ने उस को उत्तर दिया, कि हे स्वामी, इसे इस वर्ष तो और रहने दे; कि मैं इस के चारो ओर खोदकर खाद डालूं। सो आगे को फले तो भला, नहीं तो उसे काट डालना।
- John 15:2 यूहन्ना 15:2जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छांटता है ताकि और फले।
- Jude 1:12 यहूदा 1:12यह तुम्हारी प्रेम सभाओं में तुम्हारे साथ खाते- पीते, समुद्र में छिपी हुई चट्टान सरीखे हैं, और बेधड़क अपना ही पेट भरनेवाले रखवाले हैं; वे निर्जल बादल हैं; जिन्हें हवा उड़ा ले जाती है; पतझड़ के निष्फल पेड़ हैं, जो दो बार मर चुके हैं; और जड़ से उखड़ गए हैं।
- Isaiah 5:4–5 यशायाह 5:4–5मेरी दाख की बारी के लिये और क्या करना रह गया जो मैं ने उसके लिये न किया हो? फिर क्या कारण है कि जब मैं ने दाख की आशा की तब उस में निकम्मी दाखें लगीं? अब मैं तुम को जताता हूं कि अपनी दाख की बारी से क्या करूंगा। मैं उसके कांटेवाले बाड़े को उखाड़ दूंगा कि वह चट की जाए, और उसकी भीत को ढा दूंगा कि वह रौंदी जाए।
- 2 Timothy 3:5 2 तीमुथियुस 3:5वे भक्ति का भेष तो धरेंगे, पर उस की शक्ति को न मानेंगे; ऐसों से परे रहता।
- Revelation 22:11 प्रकाशितवाक्य 22:11जो अन्याय करता है, वह अन्याय ही करता रहे; और जो मलिन है, वह मलिन बना रहे; और जो धर्मी है, वह धर्मी बना रहे; और जो पवित्रा है, वह पवित्रा बना रहे।
- Hebrews 6:7–8 इब्रानियों 6:7–8क्योंकि जो भूमि वर्षा के पानी को जो उस पर बार बार पड़ता है, पी पीकर जिन लोगों के लिये वह जोती- बोई जाती है, उन के काम का साग- पात उपजाती है, वह परमेश्वर से आशीष पाती है। पर यदि वह झाड़ी और ऊंटकटारे उगाती है, तो निकम्मी और स्रापित होने पर है, और उसका अन्त जलाया जाना है।।
- Luke 19:42–44 लूका 19:42–44और कहा, क्या ही भला होता, कि तू; हां, तू ही, इसी दिन में कुशल की बातें जानता, परन्तु अब वे तेरी आंखों से छिप गई हैं। क्योंकि वे दिन तुझ पर आएंगे कि तेरे बैरी मोर्चा बान्धकर तुझे घेर लेंगे, और चारों ओर से तुझे दबाएंगे। और तुझे और तेरे बालकों को जो तुझ में हैं, मिट्टी में मिलाएंगे, और तुझ में पत्थर पर पत्थर भी न छोड़ेंगे; क्योंकि तू ने वह अवसर जब तुझ पर कृपा दृष्टि की गई न पहिचाना।।
Original words (Greek)
- And · G2532καί kaí
- saw · G1492εἴδω eídō
- a · G1520εἷς heîs
- tree · G4808συκῆ sykē
- in · G1909ἐπί epí
- way · G3598ὁδός hodós
- came · G2064ἔρχομαι érchomai
- to · G1909ἐπί epí
- it · G846αὐτός autós
- and · G2532καί kaí
- found · G2147εὑρίσκω heurískō
- nothing · G3762οὐδείς oudeís
- thereon · G1722ἐν en
- but · G1487εἰ ei
- leaves · G5444φύλλον phýllon
- only · G3440μόνον mónon
- and · G2532καί kaí
- said · G3004λέγω légō
- it · G846αὐτός autós
- And · G2532καί kaí
- presently · G3916παραχρῆμα parachrēma
- tree · G4808συκῆ sykē
- away · G3583ξηραίνω xēraínō