Proverbs · chapter 21 · verse 23
Proverbs 21:23 in Hindi
जो अपने मुंह को वश में रखता है वह अपने प्राण को विपत्तियों से बचाता है।
Jo apane munh ko vash mem rakhataa hai vah apane praan ko vipattiyom se bachaataa hai.
Proverbs 21:23 in English
- King James Version (KJV)
- Whoso keepeth his mouth and his tongue keepeth his soul from troubles.
- World English Bible (WEB)
- Whoever guards his mouth and his tongue keeps his soul from troubles.
- American Standard Version (ASV)
- Whoso keepeth his mouth and his tongue Keepeth his soul from troubles.
- Bible in Basic English (BBE)
- He who keeps watch over his mouth and his tongue keeps his soul from troubles.
- Darby Translation (DBY)
- Whoso keepeth his mouth and his tongue keepeth his soul from troubles.
- Webster's Bible (WBS)
- Whoever keepeth his mouth and his tongue keepeth his soul from troubles.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Whoso is keeping his mouth and his tongue, Is keeping from adversities his soul.
Read in context
- 21जो धर्म और कृपा का पीछा पकड़ता है, वह जीवन, धर्म और महिमा भी पाता है।
- 22बुद्धिमान शूरवीरों के नगर पर चढ़कर, उनके बल को जिस पर वे भरोसा करते हैं, नाश करता है।
- 23जो अपने मुंह को वश में रखता है वह अपने प्राण को विपत्तियों से बचाता है।
- 24जो अभिमन से रोष में आकर काम करता है, उसका नाम अभिमानी, और अंहकारी ठट्ठा करनेवाला पड़ता है।
- 25आलसी अपनी लालसा ही में मर जाता है, क्योंकि उसके हाथ काम करने से इन्कार करते हैं।
Cross references
- Proverbs 13:3 नीतिवचन 13:3जो अपने मुंह की चौकसी करता है, वह अपने प्राण की रक्षा करता है, परन्तु जो गाल बजाता उसका विनाश जो जाता है।
- Proverbs 18:21 नीतिवचन 18:21जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा।
- Proverbs 17:27–28 नीतिवचन 17:27–28जो संभलकर बोलता है, वही ज्ञानी ठहरता है; और जिसी आत्मा शान्त रहती है, सोई समझवाला पुरूष ठहरता है। मूढ़ भी जब चुप रहता है, तब बुद्धिमान गिना जाता है; और जो अपना मुंह बन्द रखता वह समझवाला गिना जाता है।।
- James 1:26 याकूब 1:26यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है।
- Proverbs 12:13 नीतिवचन 12:13बुरा मनुष्य अपने दुर्वचनों के कारण फन्दे में फंसता है, परन्तु धर्मी संकट से निकास पाता है।
- Proverbs 10:19 नीतिवचन 10:19जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है।
- James 3:2–13 याकूब 3:2–13इसलिये कि हम सब बहुत बार चूक जाते हैं: जो कोई वचन में नहीं चूकता, वही तो सिद्ध मनुष्य है; और सारी देह पर भी लगाम लगा सकता है। जब हम अपने वश में करने के लिये घोड़ों के मुंह में लगाम लगाते हैं, तो हम उन की सारी देह को भी फेर सकते हैं। देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्ड वायु से चलाए जाते हैं, तौभी एक छोटी सी पतवार के द्वारा मांझी की इच्छा के अनुसार घुमाए जाते हैं। वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े बन में आग लग जाती है। जीभ भी एक आग है: भी हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है। क्योंकि हर प्रकार के बन- पशु, पक्षी, और रेंगनेवाले जन्तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं। पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रूकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है। इसी से हम प्रभु और पिता की स्तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्वरूप में उत्पन्न हुए हैं स्राप देते हैं। एक ही मुंह से धन्यवाद और स्राप दोनों निकलते हैं। हे मेरे भाइयों, ऐसा नही होना चाहिए। क्या सोते के एक ही मुंह से मीठा और खारा जल दोनों निकलता है? हे मेरे भाइयों, क्या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता।। तुम में ज्ञानवान और समझदार कौन है? जो ऐसा हो वह अपने कामों को अच्छे चालचलन से उस नम्रता सहित प्रगट करे जो ज्ञान से उत्पन्न होती है।