Psalms · chapter 103 · verse 14
Psalm 103:14 in Hindi
क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है।।
Kyonki vah hamaaree srushti jaanataa hai; aur usako smaran rahataa hai ki manushy mittee hee hai..
Psalm 103:14 in English
- King James Version (KJV)
- For he knoweth our frame; he remembereth that we [are] dust.
- World English Bible (WEB)
- For he knows how we are made. He remembers that we are dust.
- American Standard Version (ASV)
- For he knoweth our frame; He remembereth that we are dust.
- Bible in Basic English (BBE)
- For he has knowledge of our feeble frame; he sees that we are only dust.
- Darby Translation (DBY)
- For himself knoweth our frame; he remembereth that we are dust.
- Webster's Bible (WBS)
- For he knoweth our frame; he remembereth that we [are] dust.
- Young's Literal Translation (YLT)
- For He hath known our frame, Remembering that we [are] dust.
Read in context
- 12उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उस ने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है।
- 13जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है।
- 14क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है।।
- 15मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल की नाईं फूलता है,
- 16जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है।
Cross references
- Ecclesiastes 12:7 सभोपदेशक 12:7जब मिट्टी ज्यों की त्यों मिट्टी में मिल जाएगी, और आत्मा परमेश्वर के पास जिस ने उसे दिया लौट जाएगी।
- Job 10:9 अय्यूब 10:9स्मरण कर, कि तू ने मुझ को गून्धी हुई मिट्टी की नाई बनाया, क्या तू मुझे फिर धूल में मिलाएगा?
- Psalm 78:38–39 भजन संहिता 78:38–39परन्तु वह जो दयालु है, वह अधर्म को ढांपता, और नाश नहीं करता; वह बारबार अपने क्रोध को ठण्डा करता है, और अपनी जलजलाहट को पूरी रीति से भड़कने नहीं देता। उसको स्मरण हुआ कि ये नाशमान हैं, ये वायु के समान हैं जो चली जाती और लौट नहीं आती।
- Genesis 3:19 उत्पत्ति 3:19और अपने माथे के पसीने की रोटी खाया करेगा, और अन्त में मिट्टी में मिल जाएगा; क्योंकि तू उसी में से निकाला गया है, तू मिट्टी तो है और मिट्टी ही में फिर मिल जाएगा।
- Psalm 89:47 भजन संहिता 89:47मेरा स्मरण कर, कि मैं कैसा अनित्य हूं, तू ने सब मनुष्यों को क्यों व्यर्थ सिरजा है?
- Job 7:21 अय्यूब 7:21और तू क्यों मेरा अपराध क्षमा नहीं करता? और मेरा अधर्म क्यों दूर नहीं करता? अब तो मैं मिट्टी में सो जाऊंगा, और तू मुझे यत्न से ढूंढ़ेगा पर मेरा पता नहीं मिलेगा।
- Job 7:5–7 अय्यूब 7:5–7मेरी देह कीड़ों और और मिट्टी के ढेलों से ढकी हुई है; मेरा चमड़ा सिमट जाता, और फिर गल जाता है। मेरे दिन जुलाहे की धड़की से अधिक फुत से चलनेवाले हैं और निराशा में बीते जाते हैं। याद कर कि मेरा जीवन वायु ही है; और मैं अपनी आंखों से कल्याण फिर न देखूंगा।
- Job 13:25 अय्यूब 13:25क्या तू उड़ते हुए पत्ते को भी कंपाएगा? और सूखे डंठल के पीछे पड़ेगा?
- Isaiah 29:16 यशायाह 29:16तुम्हारी कैसी उलटी समझ है! क्या कुम्हार मिट्टी के तुल्य गिना जाएगा? क्या बनाई हुई वस्तु अपने कर्त्ता के विषय कहे कि उस ने मुझे नहीं बनाया, वा रची हुई वस्तु अपने रचनेवाले के विषय कहे, कि वह कुछ समझ नहीं रखता?