Psalms · chapter 130 · verse 1
Psalm 130:1 in Hindi
हे यहोवा, मैं ने गहिरे स्थानों में से तुझ को पुकारा है!
He yahovaa, maim ne gahire sthaanom mem se tujh ko pukaaraa hai!
Psalm 130:1 in English
- King James Version (KJV)
- A Song of degrees. Out of the depths have I cried unto thee, O LORD.
- World English Bible (WEB)
- A Song of Ascents. Out of the depths I have cried to you, LORD.
- American Standard Version (ASV)
- A Song of Ascents. Out of the depths have I cried unto thee, O Jehovah.
- Bible in Basic English (BBE)
- A Song of the going up. Out of the deep have I sent up my cry to you, O Lord.
- Darby Translation (DBY)
- A Song of degrees. Out of the depths do I call upon thee, Jehovah.
- Webster's Bible (WBS)
- A Song of degrees. Out of the depths have I cried to thee, O LORD.
- Young's Literal Translation (YLT)
- A Song of the Ascents. From depths I have called Thee, Jehovah.
Read in context
- 1हे यहोवा, मैं ने गहिरे स्थानों में से तुझ को पुकारा है!
- 2हे प्रभु, मेरी सुन! तेरे कान मेरे गिड़गिड़ाने की ओर ध्यान से लगे रहें!
- 3हे याह, यदि तू अधर्म के कामों का लेखा ले, तो हे प्रभु कौन खड़ा रह सकेगा?
Cross references
- Hebrews 5:7 इब्रानियों 5:7उस ने अपनी देह में रहने के दिनों में ऊंचे शब्द से पुकार पुकारकर, और आंसू बहा बहाकर उस से जो उस को मृत्यु से बचा सकता था, प्रार्थनाएं और बिनती की और भक्ति के कारण उस की सुनी गई।
- Psalm 42:7 भजन संहिता 42:7तेरी जलधाराओं का शब्द सुनकर जल, जल को पुकारता है; तेरी सारी तरंगों और लहरों में मैं डूब गया हूं।
- Jonah 2:2–4 योना 2:2–4मैं ने संकट में पड़े हुए यहोवा की दोहाई दी, और उस ने मेरी सुन ली है; अधोलोक के उदर में से मैं चिल्ला उठा, और तू ने मेरी सुन ली। तू ने मुझे गहिरे सागर में समुद्र की थाह तक डाल दिया; और मैं धाराओं के बीच में पड़ा था, तेरी भड़काई हुई सब तरंग और लहरें मेरे ऊपर से बह गईं। तब मैं ने कहा, मैं तेरे साम्हने से निकाल दिया गया हूं; तौभी तेरे पवित्रा मन्दिर की ओर फिर ताकूंगा।
- Psalm 69:14–15 भजन संहिता 69:14–15मुझ को दलदल में से उबार, कि मैं धंस न जाऊं; मैं अपने बैरियों से, और गहिरे जल में से बच जाऊं। मैं धारा में डूब न जाऊं, और न मैं गहिरे जल में डूब मरूं, और न पाताल का मुंह मेरे ऊपर बन्द हो।।
- Psalm 116:3–4 भजन संहिता 116:3–4मृत्यु की रस्सियां मेरे चारों ओर थीं; मैं अधोलोक की सकेती में पड़ा था; मुझे संकट और शोक भोगना पड़ा। तब मैं ने यहोवा से प्रार्थना की, कि हे यहोवा बिनती सुनकर मेरे प्राण को बचा ले!
- Lamentations 3:53–55 विलापगीत 3:53–55उन्हों ने मुझे गड़हे में डालकर मेरे जीवन का अन्त करने के लिये मेरे ऊपर पत्थर लुढ़काए हैं; मेरे सिर पर से जल बह गया, मैं ने कहा, मैं अब नाश हो गया। हे यहोवा, गहिरे गड़हे में से मैं ने तुझ से प्रार्थना की;
- Psalm 69:1–2 भजन संहिता 69:1–2हे परमेश्वर, मेरा उद्धार कर, मैं जल में डूबा जाता हूं। मैं बड़े दलदल में धसा जाता हूं, और मेरे पैर कहीं नहीं रूकते; मैं गहिरे जल में आ गया, और धारा में डूबा जाता हूं।
- Psalm 25:16–18 भजन संहिता 25:16–18हे यहोवा मेरी ओर फिरकर मुझ पर अनुग्रह कर; क्योंकि मैं अकेला और दीन हूं। मेरे हृदय का क्लेश बढ़ गया है, तू मुझ को मेरे दु:खों से छुड़ा ले। तू मेरे दु:ख और कष्ट पर दृष्टि कर, और मेरे सब पापों को क्षमा कर।।
- Psalm 71:20 भजन संहिता 71:20तू ने तो हम को बहुत से कठिन कष्ट दिखाए हैं परन्तु अब तू फिर से हम को जिलाएगा; और पृथ्वी के गहिरे गड़हे में से उबार लेगा।
- Psalm 40:2 भजन संहिता 40:2उस ने मुझे सत्यानाश के गड़हे और दलदल की कीच में से उबारा, और मुझ को चट्टान पर खड़ा करके मेरे पैरों को दृढ़ किया है।
- Psalm 18:16 भजन संहिता 18:16उस ने ऊपर से हाथ बढ़ाकर मुझे थांम लिया, और गहिरे जल में से खींच लिया।
- Psalm 122:1 भजन संहिता 122:1जब लोगों ने मुझ से कहा, कि हम यहोवा के भवन को चलें, तब मैं आनन्दित हुआ।