Psalms · chapter 58 · verse 11
Psalm 58:11 in Hindi
तब मनुष्य कहने लगेंगे, निश्चय धर्मी के लिये फल है; निश्चय परमेश्वर है, जो पृथ्वी पर न्याय करता है।।
Tab manushy kahane lagenge, nishchay dharmee ke liye phal hai; nishchay parameshvar hai, jo pruthvee par nyaay karataa hai..
Psalm 58:11 in English
- King James Version (KJV)
- So that a man shall say, Verily [there is] a reward for the righteous: verily he is a God that judgeth in the earth.
- World English Bible (WEB)
- so that men shall say, “Most certainly there is a reward for the righteous. Most certainly there is a God who judges the earth.”
- American Standard Version (ASV)
- So that men shall say, Verily there is a reward for the righteous: Verily there is a God that judgeth in the earth.
- Bible in Basic English (BBE)
- So that men will say, Truly there is a reward for righteousness; truly there is a God who is judge on the earth.
- Darby Translation (DBY)
- And men shall say, Verily there is fruit for the righteous; verily there is a God that judgeth in the earth.
- Webster's Bible (WBS)
- So that a man shall say, Verily [there is] a reward for the righteous: verily he is a God that judgeth in the earth.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And man saith: 'Surely fruit [is] for the righteous: Surely there is a God judging in the earth!'
Read in context
- 9उस से पहिले कि तुम्हारी हांबियों में कांटों की आंच लगे, हरे व जले, दोनों को वह बवंडर से उड़ा ले जाएगा।।
- 10धर्मी ऐसा पलटा देखकर आनन्दित होगा; वह अपने पांव दुष्ट के लोहू में धोएगा।।
- 11तब मनुष्य कहने लगेंगे, निश्चय धर्मी के लिये फल है; निश्चय परमेश्वर है, जो पृथ्वी पर न्याय करता है।।
Cross references
- Isaiah 3:10 यशायाह 3:10धर्मियों से कहो कि उनका भला होगा, क्योंकि उसके कामों का फल उसको मिलेगा।
- Psalm 67:4 भजन संहिता 67:4राज्य राज्य के लोग आनन्द करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश देश के लोंगों का न्याय धर्म से करेगा, और पृथ्वी के राज्य राज्य के लोगों की अगुवाई करेगा।।
- Psalm 33:18 भजन संहिता 33:18देखो, यहोवा की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करूणा की आशा रखते हैं बनी रहती है,
- Psalm 64:9 भजन संहिता 64:9तब सारे लोग डर जाएंगे; और परमेश्वर के कामों का बखान करंगे, और उसके कार्यक्रम को भली भांति समझेंगे।।
- Malachi 3:14 मलाकी 3:14तुम ने कहा है कि परमेश्वर की सेवा करनी व्यर्थ है। हम ने जो उसके बताए हुए कामों को पूरा किया और सेनाओं के यहोवा के डर के मारे शोक का पहिरावा पहिने हुए चले हैं, इस से क्या लाभ हुआ?
- Malachi 2:17 मलाकी 2:17तुम लोगों ने अपनी बातों से यहोवा को उकता दिया है। तौभी पूछते हो, कि हम ने किस बाते में उसे उकता दिया? इस में, कि तुम कहते हो कि जो कोई बुरा करता है, वह यहोवा की दृष्टि में अच्छा लगता है, और वह ऐसे लोगों से प्रसन्न रहता है, और यह, कि न्यायी परमेश्वर कहां है?
- Romans 2:5 रोमियों 2:5पर अपनी कठोरता और हठीले मन के अनुसार उसके क्रोध के दिन के लिये, जिस में परमेश्वर का सच्चा न्याय प्रगट होगा, अपने निमित्त क्रोध कमा रहा है।
- Romans 6:21–22 रोमियों 6:21–22सो जिन बातों से अब तुम लज्जित होते हो, उन से उस समय तुम क्या फल पाते थे? क्योंकि उन का अन्त तो मृत्यु है परन्तु अब पाप से स्वतंत्रा होकर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिस से पवित्राता प्राप्त होती है, और उसका अन्त अनन्त जीवन है।
- Psalm 98:9 भजन संहिता 98:9यह यहोवा के साम्हने हो, क्योंकि वह पृथ्वी का न्याय करने को आनेवाला है। वह धर्म से जगत का, और सीधाई से देश देश के लोगों का न्याय करेगा।।
- Psalm 73:13–15 भजन संहिता 73:13–15निश्चय, मैं ने अपने हृदय को व्यर्थ शुद्ध किया और अपने हाथों को निर्दोषता में धोया है; क्योंकि मैं दिन भर मार खाता आया हूं और प्रति भोर को मेरी ताड़ना होती आई है।। यदि मैं ने कहा होता कि मैं ऐसा ही कहूंगा, तो देख मैं तेरे लड़कों की सन्तान के साथ क्रूरता का व्यवहार करता,
- 2 Peter 3:4–10 2 पतरस 3:4–10और कहेंगे, उसके आने की प्रतिज्ञा कहां गई? क्योंकि जब से बाप- दादे सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्टि के आरम्भ से था? वे तो जान बूझकर यह भूल गए, कि परमेश्वर के वचन के द्वारा से आकाश प्राचीन काल से वर्तमान है और पृथ्वी भी जल में से बनी और जल में स्थिर है। इन्हीं के द्वारा उस युग का जगत जल में डूब कर नाश हो गया। पर वर्तमान काल के आकाश और पृथ्वी उसी वचन के द्वारा इसलिये रखे हैं, कि जलाए जाएं; और वह भक्तिहीन मनुष्यों के न्याय और नाश होने के दिन तक ऐसे ही रखे रहेंगे।। हे प्रियों, यह एक बात तुम से छिपी न रहे, कि प्रभु के यहां एक दिन हजार वर्ष के बराबर है, और हजार वर्ष एक दिन के बराबर हैं। प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; बरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले। परन्तु प्रभु का दिन चोर की नाईं आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़हड़ाहट के शब्द से जाता रहेगा, और तत्व बहुत ही तप्त होकर पिघल जाएंगे, और पृथ्वी और उस पर के काम जल जाएेंगे।
- Psalm 9:8 भजन संहिता 9:8और वह आप ही जगत का न्याय धर्म से करेगा, वह देश देश के लोगों का मुक मा खराई से निपटाएगा।।