Romans · chapter 12 · verse 12
Romans 12:12 in Hindi
आशा मे आनन्दित रहो; क्लेश मे स्थिर रहो; प्रार्थना मे नित्य लगे रहो।
Aashaa me aanandit raho; klesh me sthir raho; praarthanaa me nity lage raho.
Romans 12:12 in English
- King James Version (KJV)
- Rejoicing in hope; patient in tribulation; continuing instant in prayer;
- World English Bible (WEB)
- rejoicing in hope, enduring in troubles, continuing steadfastly in prayer,
- American Standard Version (ASV)
- rejoicing in hope; patient in tribulation; continuing stedfastly in prayer;
- Bible in Basic English (BBE)
- Being glad in hope, quiet in trouble, at all times given to prayer,
- Darby Translation (DBY)
- As regards hope, rejoicing: as regards tribulation, enduring: as regards prayer, persevering:
- Webster's Bible (WBS)
- Rejoicing in hope; patient in tribulation; continuing earnest in prayer;
- Young's Literal Translation (YLT)
- in the hope rejoicing; in the tribulation enduring; in the prayer persevering;
Read in context
- 10भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर मया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
- 11प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
- 12आशा मे आनन्दित रहो; क्लेश मे स्थिर रहो; प्रार्थना मे नित्य लगे रहो।
- 13पवित्रा लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने मे लगे रहो।
- 14अपने सतानेवालों को आशीष दो; आशीष दो स्त्राप न दो।
Cross references
- Romans 15:13 रोमियों 15:13सो परमेश्वर जो आशा का दाता है तुम्हें विश्वास करने में सब प्रकार के आनन्द और शान्ति से परिपूर्ण करे, कि पवित्राआत्मा की सामर्थ से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए।।
- Hebrews 10:36 इब्रानियों 10:36क्योंकि तुम्हें धीरज धरना अवश्य है, ताकि परमेश्वर की इच्छा को पूरी करके तुम प्रतिज्ञा का फल पाओ।
- Psalm 62:8 भजन संहिता 62:8हे लोगो, हर समय उस पर भरोसा रखो; उस से अपने अपने मन की बातें खोलकर कहो; परमेश्वर हमारा शरणस्थान है।
- Romans 5:2–4 रोमियों 5:2–4जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें। केवल यही नहीं, बरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है।
- Philippians 4:6–7 फिलिप्पियों 4:6–7किसी भी बात की चिन्ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी।।
- James 5:7 याकूब 5:7सो हे भाइयों, प्रभु के आगमन तक धीरज धरो, देखो, गृहस्थ पृथ्वी के बहुमूल्य फल की आशा रखता हुआ प्रथम और अन्तिम वर्षा होने तक धीरज धरता है।
- 1 Peter 4:13 1 पतरस 4:13पर जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्दित और मगन हो।
- Jeremiah 29:12–13 यिर्मयाह 29:12–13तब उस समय तुम मुझ को पुकारोगे और आकर मुझ से प्रार्थना करोगे और मैं तुम्हारी सुनूंगा। तुम मुझे ढूंढ़ोगे और पाओगे भी; क्योंकि तुम अपने सम्पूर्ण मन से मेरे पास आओगे।
- 1 Thessalonians 5:16–17 1 थिस्सलुनीकियों 5:16–17सदा आनन्दित रहो। निरन्तर प्रार्थना मे लगे रहो।
- Hebrews 6:15 इब्रानियों 6:15और इस रीति से उस ने धीरज धरकर प्रतिज्ञा की हुई बात प्राप्त की।
- James 1:3–4 याकूब 1:3–4तो इसे पूरे आनन्द की बात समझो, यह जानकर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे।।
- Philippians 4:4 फिलिप्पियों 4:4प्रभु में सदा आनन्दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्दित रहो।