Romans · chapter 12 · verse 10
Romans 12:10 in Hindi
भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर मया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
Bhaaeechaare ke prem se ek doosare par mayaa rakho; paraspar aadar karane mem ek doosare se badh chalo.
Romans 12:10 in English
- King James Version (KJV)
- [Be] kindly affectioned one to another with brotherly love; in honour preferring one another;
- World English Bible (WEB)
- In love of the brothers be tenderly affectionate to one another; in honor prefer one another,
- American Standard Version (ASV)
- In love of the brethren be tenderly affectioned one to another; in honor preferring one another;
- Bible in Basic English (BBE)
- Be kind to one another with a brother's love, putting others before yourselves in honour;
- Darby Translation (DBY)
- as to brotherly love, kindly affectioned towards one another: as to honour, each taking the lead in paying it to the other:
- Webster's Bible (WBS)
- [Be] kindly affectioned one to another with brotherly love; in honor preferring one another;
- Young's Literal Translation (YLT)
- in the love of brethren, to one another kindly affectioned: in the honour going before one another;
Read in context
- 8जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देनेवाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।
- 9प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई मे लगे रहो।
- 10भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर मया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
- 11प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
- 12आशा मे आनन्दित रहो; क्लेश मे स्थिर रहो; प्रार्थना मे नित्य लगे रहो।
Cross references
- Philippians 2:3 फिलिप्पियों 2:3विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।
- John 13:34–35 यूहन्ना 13:34–35मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो। यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो।।
- Hebrews 13:1 इब्रानियों 13:1भाईचारे की प्रीति बनी रहे।
- 1 John 4:11 1 यूहन्ना 4:11हे प्रियों, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।
- 1 Peter 3:8–9 1 पतरस 3:8–9निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखनेवाले, और करूणामय, और नम्र बनो। बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो।
- 1 Peter 1:22 1 पतरस 1:22सो जब कि तुम ने भाईचारे की निष्कपट प्रीति के निमित्त सत्य के मानने से अपने मनों को पवित्र किया है, तो तन मन लगा कर एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो।
- 1 Peter 2:17 1 पतरस 2:17सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्वर से डरो, राजा का सम्मान करो।।
- 1 Thessalonians 4:9 1 थिस्सलुनीकियों 4:9किन्तु भाईचारे की प्रीति के विषय में यह अवश्य नहीं, कि मैं तुम्हारे पास कुछ लिखूं; क्योंकि आपस में प्रेम रखना तुम ने आप ही परमेश्वर से सीखा है।
- Galatians 5:13 गलातियों 5:13हे भाइयों, तुम स्वतंत्रा होने के लिये बुलाए गए हो परन्तु ऐसा न हो, कि यह स्वतंत्राता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, बरन प्र्रेम से एक दूसरे के दास बनो।
- Ephesians 4:1–3 इफिसियों 4:1–3सो मैं जो प्रभु में बन्धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो। अर्थात् सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे को सह लो। और मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्न करो।
- Galatians 5:22 गलातियों 5:22पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज,
- Psalm 133:1 भजन संहिता 133:1देखो, यह क्या ही भली और मनोहर बात है कि भाई लोग आपस में मिले रहें!