Romans · chapter 14 · verse 18
Romans 14:18 in Hindi
जो पवित्राआत्मा से होता है और जो कोई इस रीति से मसीह की सेवा करता है, वह परमेश्वर को भाता है और मनुष्यों में ग्रहणयोग्य ठहरता है।
Jo pavitraaaatmaa se hotaa hai aur jo koee is reeti se maseeh kee sevaa karataa hai, vah parameshvar ko bhaataa hai aur manushyom mem grahanayogy thaharataa hai.
Romans 14:18 in English
- King James Version (KJV)
- For he that in these things serveth Christ [is] acceptable to God, and approved of men.
- World English Bible (WEB)
- For he who serves Christ in these things is acceptable to God and approved by men.
- American Standard Version (ASV)
- For he that herein serveth Christ is well-pleasing to God, and approved of men.
- Bible in Basic English (BBE)
- And he who in these things is Christ's servant, is pleasing to God and has the approval of men.
- Darby Translation (DBY)
- For he that in this serves the Christ [is] acceptable to God and approved of men.
- Webster's Bible (WBS)
- For he that in these things serveth Christ, [is] acceptable to God, and approved by men.
- Young's Literal Translation (YLT)
- for he who in these things is serving the Christ, [is] acceptable to God and approved of men.
Read in context
- 16अब तुम्हारी भलाई की निन्दा न होने पाए।
- 17क्योंकि परमशॆवर का राज्या खानापीना नहीं; परन्तु धर्म और मिलाप और वह आनन्द है;
- 18जो पवित्राआत्मा से होता है और जो कोई इस रीति से मसीह की सेवा करता है, वह परमेश्वर को भाता है और मनुष्यों में ग्रहणयोग्य ठहरता है।
- 19इसलिये हम उन बातों का प्रयत्न करें जिनसे मेल मिलाप और एक दूसरे का सुधार हो।
- 20भोजन के लिये परमेश्वर का काम न बिगाड़: सब कुछ शुद्ध तो है, परन्तु उस मनुष्य के लिये बुरा है, जिस को उसके भोजन करने से ठोकर लगती है।
Cross references
- 2 Corinthians 8:21 2 कुरिन्थियों 8:21क्योंकि जो बातें केवल प्रभु ही के निकट नहीं, परन्तु मनुष्यों के निकट भी भली हैं हम उन की चिन्ता करते हैं।
- 1 Peter 2:5 1 पतरस 2:5तुम भी आप जीवते पत्थरों की नाई आत्मिक घर बनते जाते हो, जिस से याजकों का पवित्रा समाज बनकर, ऐसे आत्मिक बलिदान चढ़ाओ, जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को ग्राह्य हो।
- 1 Peter 2:20 1 पतरस 2:20क्योंकि यदि तुम ने अपराध करके घूसे खाए और धीरज धरा, तो उस में क्या बड़ाई की बात है? पर यदि भला काम करके दुख उठाते हो और धीरज धरते हो, तो यह परमेश्वर को भाता है।
- 2 Corinthians 5:11 2 कुरिन्थियों 5:11सो प्रभु का भय मानकर हम लोगों को समझाते हैं और परमेश्वर पर हमारा हाल प्रगट है; और मेरी आशा यह है, कि तुम्हारे विवेक पर भी प्रगट हुआ होगा।
- 1 Thessalonians 1:3–4 1 थिस्सलुनीकियों 1:3–4और अपने परमेश्वर और पिता के साम्हने तुम्हारे विश्वास के काम, और प्रेम का परिश्रम, और हमारे प्रभु यीशु मसीह में आशा की धीरता को लगातार स्मरण करते हैं। और हे भाइयो, परमेश्वर के प्रिय लोगों हम जानतें हैं, कि तुम चुने हुए हो।
- Romans 12:1–2 रोमियों 12:1–2इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरो कों जीवित, और पवित्रा, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल- चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो।।
- Acts 10:35 प्रेरितों के काम 10:35अब मुझे निश्चय हुआ, कि परमेश्वर किसी का पक्ष नहीं करता, वरन हर जाति में जो उस से डरता और धर्म के काम करता है, वह उसे भाता है।
- 1 Timothy 5:4 1 तीमुथियुस 5:4और यदि किसी विधवा के लड़केबाले या नातीपोते हों, तो वे पहिले अपने ही घराने के साथ भक्ति का बर्ताव करना, और अपने माता- पिता आदि को उन का हक देना सीखें, क्योंकि यह परमेश्वर को भाता है।
- Romans 16:18 रोमियों 16:18क्योंकि ऐसे लोग हमारे प्रभु मसीह की नहीं, परन्तु अपने पेट की सेवा करते है; और चिकनी चुमड़ी बातों से सीधे सादे मन के लोगों को बहका देते हैं।
- Colossians 3:24 कुलुस्सियों 3:24क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हें इस के बदले प्रभु से मीरास मिलेगी: तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो।
- 2 Corinthians 6:4 2 कुरिन्थियों 6:4परन्तु हर बात में परमेश्वर के सेवकों की नाई अपने सद्गुणों को प्रगट करते हैं, बड़े धैर्य से, क्लेशों से, दरिद्रता से, संकटो से।
- Romans 6:22 रोमियों 6:22क्योंकि उन का अन्त तो मृत्यु है परन्तु अब पाप से स्वतंत्रा होकर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिस से पवित्राता प्राप्त होती है, और उसका अन्त अनन्त जीवन है।