Genesis · chapter 41 · verse 54
Genesis 41:54 in Hindi
और यूसुफ के कहने के अनुसार सात वर्षों के लिये अकाल आरम्भ हो गया। और सब देशों में अकाल पड़ने लगा; परन्तु सारे मि देश में अन्न था।
Aur yoosuph ke kahane ke anusaar saat varshom ke liye akaal aarambh ho gayaa. Aur sab deshom mem akaal padane lagaa; parantu saare mi desh mem ann thaa.
Genesis 41:54 in English
- King James Version (KJV)
- And the seven years of dearth began to come, according as Joseph had said: and the dearth was in all lands; but in all the land of Egypt there was bread.
- World English Bible (WEB)
- The seven years of famine began to come, just as Joseph had said. There was famine in all lands, but in all the land of Egypt there was bread.
- American Standard Version (ASV)
- And the seven years of famine began to come, according as Joseph had said: and there was famine in all lands; but in all the land of Egypt there was bread.
- Bible in Basic English (BBE)
- Then came the first of the seven years of need as Joseph had said: and in every other land they were short of food; but in the land of Egypt there was bread.
- Darby Translation (DBY)
- and the seven years of the dearth began to come, according as Joseph had said. And there was dearth in all lands; but in all the land of Egypt there was bread.
- Webster's Bible (WBS)
- And the seven years of dearth began to come, according as Joseph had said: and the dearth was in all lands; but in all the land of Egypt there was bread.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and the seven years of famine begin to come, as Joseph said, and famine is in all the lands, but in all the land of Egypt hath been bread;
Read in context
- 52और दूसरे का नाम उस ने यह कहकर एप्रैम रखा, कि मुझे दु:ख भोगने के देश में परमेश्वर ने फुलाया फलाया है।
- 53और मि देश के सुकाल के वे सात वर्ष समाप्त हो गए।
- 54और यूसुफ के कहने के अनुसार सात वर्षों के लिये अकाल आरम्भ हो गया। और सब देशों में अकाल पड़ने लगा; परन्तु सारे मि देश में अन्न था।
- 55जब मि का सारा देश भूखों मरने लगा; तब प्रजा फिरोन से चिल्ला चिल्लाकर रोटी मांगने लगी: और वह सब मिस्त्रियों से कहा करता था, यूसुफ के पास जाओ: और जो कुछ वह तुम से कहे, वही करो।
- 56सो जब अकाल सारी पृथ्वी पर फैल गया, और मि देश में काल का भयंकर रूप हो गया, तब यूसुफ सब भण्डारों को खोल खोलके मिस्त्रियों के हाथ अन्न बेचने लगा।
Cross references
- Acts 7:11 प्रेरितों के काम 7:11तब मिसर और कनान के सारे देश में अकाल पडा; जिस से भारी क्लेश हुआ, और हमारे बाप दादों को अन्न नहीं मिलता था।
- Genesis 45:11 उत्पत्ति 45:11और अकाल के जो पांच वर्ष और होंगे, उन में मै वहीं तेरा पालन पोषण करूंगा; ऐसा न हो कि तू, और तेरा घराना, वरन जितने तेरे हैं, सो भूखों मरें।
- Psalm 105:16 भजन संहिता 105:16फिर उस ने उस देश में अकाल भेजा, और अन्न के सब आधार को दूर कर दिया।
- Genesis 41:30 उत्पत्ति 41:30उनके पश्चात् सात वर्ष अकाल के आयेंगे, और सारे मि देश में लोग इस सारी उपज को भूल जायेंगे; और अकाल से देश का नाश होगा।
- Genesis 41:3–4 उत्पत्ति 41:3–4और, क्या देखा, कि उनके पीछे और सात गायें, जो कुरूप और दुर्बल हैं, नदी से निकली; और दूसरी गायों के निकट नदी के तट पर जा खड़ी हुई। तब ये कुरूप और दुर्बल गायें उन सात सुन्दर और मोटी मोटी गायों को खा गई। तब फिरौन जाग उठा।
- Genesis 41:27 उत्पत्ति 41:27फिर उनके पीछे जो दुर्बल और कुडौल गायें निकलीं, और जो सात छूछी और पुरवाई से मुरझाई हुई बालें निकाली, वे अकाल के सात वर्ष होंगे।
- Genesis 42:2 उत्पत्ति 42:2और उस नदी में से सात सुन्दर और मोटी मोटी गायें निकलकर कछार की घास चरने लगीं।
- Genesis 47:13 उत्पत्ति 47:13और उस सारे देश में खाने को कुछ न रहा; क्योंकि अकाल बहुत भारी था, और अकाल के कारण मि और कनान दोनों देश नाश हो गए।
- Genesis 41:6–7 उत्पत्ति 41:6–7और, क्या देखा, कि उनके पीछे सात बालें पतली और पुरवाई से मुरझाई हुई निकलीं। और इन पतली बालों ने उन सातों मोटी और अन्न से भरी हुई बालों को निगल लिया। तब फिरौन जागा, और उसे मालूम हुआ कि यह स्वप्न ही था।
- Genesis 43:1 उत्पत्ति 43:1और अकाल देश में और भी भयंकर होता गया।
- Genesis 42:5–6 उत्पत्ति 42:5–6और वह फिर सो गया और दूसरा स्वप्न देखा, कि एक डंठी में से सात मोटी और अच्छी अच्छी बालें निकलीं। और, क्या देखा, कि उनके पीछे सात बालें पतली और पुरवाई से मुरझाई हुई निकलीं।
Original words (Hebrew)
- seven · H7651שֶׁבַע shebaʻ
- years · H8141שָׁנֶה shâneh
- dearth · H7458רָעָב râʻâb
- began · H2490חָלַל châlal
- come · H935בּוֹא bôwʼ
- Joseph · H3130יוֹסֵף Yôwçêph
- said · H559אָמַר ʼâmar
- dearth · H7458רָעָב râʻâb
- lands · H776אֶרֶץ ʼerets
- land · H776אֶרֶץ ʼerets
- Egypt · H4714מִצְרַיִם Mitsrayim
- bread · H3899לֶחֶם lechem