Genesis · chapter 7 · verse 21
Genesis 7:21 in Hindi
और क्या पक्षी, क्या घरेलू पशु, क्या बनैले पशु, और पृथ्वी पर सब चलनेवाले प्राणी, और जितने जन्तु पृथ्वी मे बहुतायत से भर गए थे, वे सब, और सब मनुष्य मर गए।
Aur kyaa pakshee, kyaa ghareloo pashu, kyaa banaile pashu, aur pruthvee par sab chalanevaale praanee, aur jitane jantu pruthvee me bahutaayat se bhar gae the, ve sab, aur sab manushy mar gae.
Genesis 7:21 in English
- King James Version (KJV)
- And all flesh died that moved upon the earth, both of fowl, and of cattle, and of beast, and of every creeping thing that creepeth upon the earth, and every man:
- World English Bible (WEB)
- All flesh died that moved on the earth, including birds, livestock, animals, every creeping thing that creeps on the earth, and every man.
- American Standard Version (ASV)
- And all flesh died that moved upon the earth, both birds, and cattle, and beasts, and every creeping thing that creepeth upon the earth, and every man:
- Bible in Basic English (BBE)
- And destruction came on every living thing moving on the earth, birds and cattle and beasts and everything which went on the earth, and every man.
- Darby Translation (DBY)
- And all flesh that moved on the earth expired, fowl as well as cattle, and beasts, and all crawling things which crawl on the earth, and all mankind:
- Webster's Bible (WBS)
- And all flesh died that moved upon the earth, both of fowl, and of cattle, and of beast, and of every creeping animal that creepeth upon the earth, and every man:
- Young's Literal Translation (YLT)
- and expire doth all flesh that is moving on the earth, among fowl, and among cattle, and among beasts, and among all the teeming things which are teeming on the earth, and all mankind;
Read in context
- 19और जल पृथ्वी पर अत्यन्त बढ़ गया, यहां तक कि सारी धरती पर जितने बड़े बड़े पहाड़ थे, सब डूब गए।
- 20जल तो पन्द्रह हाथ ऊपर बढ़ गया, और पहाड़ भी डूब गए
- 21और क्या पक्षी, क्या घरेलू पशु, क्या बनैले पशु, और पृथ्वी पर सब चलनेवाले प्राणी, और जितने जन्तु पृथ्वी मे बहुतायत से भर गए थे, वे सब, और सब मनुष्य मर गए।
- 22जो जो स्थल पर थे उन में से जितनों के नथनों में जीवन का श्वास था, सब मर मिटे।
- 23और क्या मनुष्य, क्या पशु, क्या रेंगनेवाले जन्तु, क्या आकाश के पक्षी, जो जो भूमि पर थे, सो सब पृथ्वी पर से मिट गए; केवल नूह, और जितने उसके संग जहाज में थे, वे ही बच गए।
Cross references
- Genesis 6:13 उत्पत्ति 6:13तब परमेश्वर ने नूह से कहा, सब प्राणियों के अन्त करने का प्रश्न मेरे साम्हने आ गया है; क्योंकि उनके कारण पृथ्वी उपद्रव से भर गई है, इसलिये मै उनको पृथ्वी समेत नाश कर डालूंगा।
- Genesis 7:4 उत्पत्ति 7:4क्योंकि अब सात दिन और बीतने पर मैं पृथ्वी पर चालीस दिन और चालीस रात तक जल बरसाता रहूंगा; जितनी वस्तुएं मैं ने बनाईं है सब को भूमि के ऊपर से मिटा दूंगा।
- Genesis 6:17 उत्पत्ति 6:17और सुन, मैं आप पृथ्वी पर जलप्रलय करके सब प्राणियों को, जिन में जीवन की आत्मा है, आकाश के नीचे से नाश करने पर हूं: और सब जो पृथ्वी पर है मर जाएंगे।
- Genesis 6:6–7 उत्पत्ति 6:6–7और यहोवा पृथ्वी पर मनुष्य को बनाने से पछताया, और वह मन में अति खेदित हुआ। तब यहोवा ने सोचा, कि मै मनुष्य को जिसकी मै ने सृष्टि की है पृथ्वी के ऊपर से मिटा दूंगा क्योंकि मैं उनके बनाने से पछताता हूं।
- Romans 8:20 रोमियों 8:20क्योंकि सृष्टि अपनी इच्छा से नहीं पर आधीन करनेवाले की ओर से व्यर्थता के आधीन इस आशा से की गई।
- Isaiah 24:6 यशायाह 24:6इस कारण पृथ्वी को शाप ग्रसेगा और उस में रहनेवाले दोषी ठहरेंगे; और इसी कारण पृथ्वी के निवासी भस्म होंगे और थोड़े ही मनुष्य रह जाएंगे।
- Job 22:15–17 अय्यूब 22:15–17क्या तू उस पुराने रास्ते को पकड़े रहेगा, जिस पर वे अनर्थ करनेवाले चलते हैं? वे अपने समय से पहले उठा लिए गए और उनके घर की नेव नदी बहा ले गई। उन्हों ने ईश्वर से कहा था, हम से दूर हो जा; और यह कि सर्वशक्तिमान हमारा क्या कर सकता है?
- Joel 1:17–20 योएल 1:17–20बीज ढेलों के नीचे झुलस गए, भण्डार सूने पड़े हैं; खत्ते गिर पड़े हैं, क्योंकि खेती मारी गई। पशु कैसे कराहते हैं? झुण्ड के झुण्ड गाय- बैल विकल हैं, क्योंकि उनके लिये चराई नहीं रही; और झुण्ड के झुण्ड भेड़- बकरियां पाप का फल भोग रही हैं।। हे यहोवा, मैं तेरी दोहाई देता हूं, क्योंकि जंगल की चराइयां आग का कौर हो गईं, और मैदान के सब वृक्ष ज्वाला से जल गए। वन- पशु भी तेरे लिये हांफते हैं, क्योंकि जल के सोते सूख गए, और जंगल की चराइयां आग का कौर हो गईं।।
- Zephaniah 1:3 सपन्याह 1:3मैं मनुष्य और पशु दोनों का अन्त कर दूंगा; मैं आकाश के पक्षियों और समुद्र की मछलियों का, और दुष्टों समेत उनकी रखी हुई ठोकरों के कारण का भी अन्त कर दूंगा; मैं मनुष्य जाति को भी धरती पर से नाश कर डालूंगा, यहोवा की यही वाणी है।
- Jeremiah 12:3–4 यिर्मयाह 12:3–4हे यहोवा तू मुझे जानता है; तू मुझे देखता है, और तू ने मेरे मन की परीक्षा करके देखा कि मैं तेरी ओर किस प्रकार रहता हूँ। जैसे भेड़- बकरियां घात होने के लिये झुण्ड में से निकाली जाती हैं, वैसे ही उनको भी निकाल ले और वध के दिन के लिये तैयार कर। कब तक देश विलाप करता रहेगा, और सारे मैदान की घास सूखी रहेगी? देश के निवासियों की बुराई के कारण पशु- पक्षी सब नाश हो गए हैं, क्योंकि उन लोगों ने कहा, वह हमारे अन्त को न देखेगा।
- Isaiah 24:19 यशायाह 24:19वह मतवाले की नाईं बहुत डगमगाएगी
- Jeremiah 4:22–27 यिर्मयाह 4:22–27क्योंकि मेरी प्रजा मूढ़ है, वे मुझे नहीं जानते; वे ऐसे मूर्ख लड़के हैं जिन में कुछ भी समझ नहीं। बुराई करने को तो वे बुध्दिमान हैं, परन्तु भलाई करना वे नहीं जानते। मैं ने पृथ्वी पर देखा, वह सूनी और सुनसान पड़ी थी; और आकाश को, और उस में कोई ज्योति नहीं थी। मैं ने पहाड़ों को देखा, मे हिल रहे थे, और सब पहाड़ियों को कि वे डोल रही थीं। फिर मैं ने क्या देखा कि कोई पनुष्य भी न था और सब पक्षी भी उड़ गए थे। फिर मैं क्या देखता हूँ कि यहोवा के प्रताप और उस भड़के हुए प्रकोप के कारण उपजाऊ देश जंगल, और उसके सारे नगर खण्डहर हो गए थे। क्योंकि यहोवा ने यह बताया कि सारा देश उजाड़ हो जाएगा; तौभी मैं उसका अन्त न कर डालूंगा।