Job · chapter 30 · verse 28
Job 30:28 in Hindi
मैं शोक का पहिरावा पहिने हुए मानो बिना सूर्य की गमीं के काला हो गया हूँ। और सभा में खड़ा हो कर सहायता के लिये दोहाई देता हूँ।
Maim shok kaa pahiraavaa pahine hue maano binaa soory kee gameem ke kaalaa ho gayaa hoon. Aur sabhaa mem khadaa ho kar sahaayataa ke liye dohaaee detaa hoon.
Job 30:28 in English
- King James Version (KJV)
- I went mourning without the sun: I stood up, [and] I cried in the congregation.
- World English Bible (WEB)
- I go mourning without the sun. I stand up in the assembly, and cry for help.
- American Standard Version (ASV)
- I go mourning without the sun: I stand up in the assembly, and cry for help.
- Bible in Basic English (BBE)
- I go about in dark clothing, uncomforted; I get up in the public place, crying out for help.
- Darby Translation (DBY)
- I go about blackened, but not by the sun; I stand up, I cry in the congregation.
- Webster's Bible (WBS)
- I went mourning without the sun: I stood up, [and] I cried in the congregation.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Mourning I have gone without the sun, I have risen, in an assembly I cry.
Read in context
- 26जब मैं कुशल का मार्ग जोहता था, तब विपत्ति आ पड़ी; और जब मैं उजियाले का आसरा लगाए था, तब अन्धकार छा गया।
- 27मेरी अन्तडिय़ां निरन्तर उबलती रहती हैं और आराम नहीं पातीं; मेरे दु:ख के दिन आ गए हैं।
- 28मैं शोक का पहिरावा पहिने हुए मानो बिना सूर्य की गमीं के काला हो गया हूँ। और सभा में खड़ा हो कर सहायता के लिये दोहाई देता हूँ।
- 29मैं गीदड़ों का भाई और शुतुर्मुर्गों का संगी हो गया हूँ।
- 30मेरा चमड़ा काला हो कर मुझ पर से गिरता जाता है, और तप के मारे मेरी हड्डियां जल गई हैं।
Cross references
- Psalm 43:2 भजन संहिता 43:2क्योंकि हे परमेश्वर, तू ही मेरी शरण है, तू ने क्यों मुझे त्याग दिया है? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे शोक का पहिरावा पहिने हुए क्यों फिरता रहूं?
- Psalm 38:6 भजन संहिता 38:6मैं बहुत दुखी हूं और झूक गया हूं; दिन भर मैं शौक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं।
- Psalm 42:9 भजन संहिता 42:9मैं ईश्वर से जो मेरी चट्टान है कहूंगा, तू मुझे क्यों भूल गया? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे क्यों शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं?
- Job 19:7 अय्यूब 19:7देखो, मैं उपद्रव! उपद्रव! यों चिल्लाता रहता हूँ, परन्तु कोई नहीं सुनता; मैं सहायता के लिये दोहाई देता रहता हूँ, परन्तु कोई न्याय नहीं करता।
- Lamentations 3:1–3 विलापगीत 3:1–3उसके रोष की छड़ी से दु:ख भोगनेवाला पुरूष मैं ही हूं; वह मुझे ले जाकर उजियाले में नहीं, अन्धियारे ही में चलाता है; उसका हाथ दिन भर मेरे ही विरूद्ध उठता रहता है।
- Isaiah 53:3–4 यशायाह 53:3–4वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।। निश्चय उस ने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा- कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा।