Mark · chapter 1 · verse 22
Mark 1:22 in Hindi
और लोग उसके उपदेश से चकित हुए; क्योंकि वह उन्हें शास्त्रियों की नाईं नहीं, परन्तु अधिकारी की नाई उपदेश देता था।
Aur log usake upadesh se chakit hue; kyonki vah unhem shaastriyom kee naaeem naheem, parantu adhikaaree kee naaee upadesh detaa thaa.
Mark 1:22 in English
- King James Version (KJV)
- And they were astonished at his doctrine: for he taught them as one that had authority, and not as the scribes.
- World English Bible (WEB)
- They were astonished at his teaching, for he taught them as having authority, and not as the scribes.
- American Standard Version (ASV)
- And they were astonished at his teaching: for he taught them as having authority, and not as the scribes.
- Bible in Basic English (BBE)
- And they were full of wonder at his teaching, because he gave it as one having authority, and not like the scribes.
- Darby Translation (DBY)
- And they were astonished at his doctrine, for he taught them as having authority, and not as the scribes.
- Webster's Bible (WBS)
- And they were astonished at his doctrine: for he taught them as one that had authority, and not as the scribes.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and they were astonished at his teaching, for he was teaching them as having authority, and not as the scribes.
Read in context
- 20उस ने तुरन्त उन्हें बुलाया; और वे अपने पिता जब्दी को मजदूरी के साथ नाव पर छोड़कर, उसके पीछे चले गए।।
- 21और वे कफरनहूम में आए, और वह तुरन्त सब्त के दिन सभा के घर में जाकर उपदेश करने लगा।
- 22और लोग उसके उपदेश से चकित हुए; क्योंकि वह उन्हें शास्त्रियों की नाईं नहीं, परन्तु अधिकारी की नाई उपदेश देता था।
- 23और उसी समय, उन की सभा के घर में एक मनुष्य था, जिस में एक अशुद्ध आत्मा थी।
- 24उस ने चिल्लाकर कहा, हे यीशु नासरी, हमें तुझ से क्या काम? क्या तू हमें नाश करने आया है? मैं तुझे जानता हूं, तू कौन है? परमेश्वर का पवित्रा जन!
Cross references
- Matthew 7:28–29 मत्ती 7:28–29जब यीशु ये बातें कह चुका, तो ऐसा हुआ कि भीड़ उसके उपदेश से चकित हुई। क्योंकि वह उन के शास्त्रियों के समान नहीं परन्तु अधिकारी की नाई उन्हें उपदेश देता था।।
- Matthew 13:54 मत्ती 13:54और अपने देश में आकर उन की सभा में उन्हें ऐसा उपदेश देने लगा; कि वे चकित होकर कहने लगे; कि इस को यह ज्ञान और समर्थ के काम कहां से मिले?
- Luke 4:32 लूका 4:32वे उस के उपदेश से चकित हो गए क्योंकि उसका वचन अधिकार सहित था।
- John 7:46 यूहन्ना 7:46सिपाहियों ने उत्तर दिया, कि किसी मनुष्य ने कभी ऐसी बातें न की।
- Jeremiah 23:29 यिर्मयाह 23:29यहोवा की यह भी वाणी है कि क्या मेरा वचन आग सा नहीं है? फिर क्या वह ऐसा हथौड़ा नहीं जो पत्थर को फोड़ डाले?
- Acts 6:10 प्रेरितों के काम 6:10परन्तु उस ज्ञान और उन आत्मा का जिस से वह बातें करता था, वे साम्हना न कर सके।
- Luke 21:15 लूका 21:15क्योंकि मैं तुम्हें ऐसा बोल और बुद्धि दूंगा, कि तुम्हारे सब विरोधी साम्हना या खण्डन न कर सकेंगे।
- Acts 9:21–22 प्रेरितों के काम 9:21–22और सब सुननेवाले चकित होकर कहने लगे; क्या यह वही व्यक्ति नहीं है जो यरूशलेम में उन्हें जो इस नाम को लेते थे नाश करता था, और यहां भी इसी लिये आया था, कि उन्हों बान्धकर महायाजकों के पास ले आए? परन्तु शाऊल और भी सामर्थी होता गया, और इस बात का प्रमाण दे देकर कि मसीह यही है, दमिश्क के रहनेवाले यहूदियों का मुंह बन्द करता रहा।।
- 2 Corinthians 4:2 2 कुरिन्थियों 4:2परन्तु हम ने लज्जा के गुप्त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट करके, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं।
- Hebrews 4:12–13 इब्रानियों 4:12–13क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग करके, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। और सृष्टि की कोई वस्तु उस से छिपी नहीं है बरन जिस से हमें काम है, उस की आंखों के साम्हने सब वस्तुएं खुली और बेपरद हैं।।
- Mark 7:3–13 मरकुस 7:3–13क्योंकि फरीसी और सब यहूदी, पुरनियों की रीति पर चलते हैं और जब तक भली भांति हाथ नहीं धो लेते तब तक नहीं खाते। और बाजार से आकर, जब तक स्नान नहीं कर लेते, तब तक नहीं खाते; और बहुत सी और बातें हैं, जो उन के पास मानने के लिये पहुंचाई गई हैं, जैसे कटोरों, और लोटों, और तांबे के बरतनों को धोना- मंाजना। इसलिये उन फरीसियों और शास्त्रियों ने उस से पूछा, कि तेरे चेले क्यों पुरनियों की रीतों पर नहीं चलते, और बिना हाथ धोए रोटी खाते हैं? उस ने उन से कहा; कि यशायाह ने तुम कपटियों के विषय में बहुत ठीक भविष्यद्ववाणी की; जैसा लिखा है; कि ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उन का मन मुझ से दूर रहता है। और ये व्यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्योंकि मनुष्यों की आज्ञाओं को धर्मोंपादेश करके सिखाते हैं। क्योंकि तुम परमेश्वर की आज्ञा को टालकर मनुष्यों की रीतियों को मानते हो। और उस ने उन से कहा; तुम अपनी रीतियों को मानने के लिये परमेश्वर आज्ञा कैसी अच्छी तरह टाल देते हो! क्योंकि मूसा ने कहा है कि अपने पिता और अपनी माता का आदर कर; ओर जो कोई पिता वा माता को बुरा कहे, वह अवश्य मार डाला जाए। परन्तु तुम कहते हो कि यदि कोई अपने पिता वा माता से कहे, कि जो कुछ तुझे मुझ से लाभ पहुंच सकता था, वह कुरबान अर्थात् संकल्प हो चुका। तो तुम उस को उसके पिता वा उस की माता की कुछ सेवा करने नहीं देते। इस प्रकार तुम अपनी रीतियों से, जिन्हें तुम ने ठहराया है, परमेश्वर का वचन टाल देते हो; और ऐसे ऐसे बहुत से काम करते हो।
- Matthew 23:16–24 मत्ती 23:16–24हे अन्धे अगुवों, तुम पर हाय, जो कहते हो कि यदि कोई मन्दिर की शपथ खाए तो कुछ नहीं, परन्तु यदि कोई मन्दिर के सोने की सौगन्ध खाए तो उस से बन्ध जाएगा। हे मूर्खो, और अन्धों, कौन बड़ा है, सोना या वह मन्दिर जिस से सोना पवित्रा होता है? फिर कहते हो कि यदि कोई वेदी की शपथ खाए तो कुछ नहीं, परन्तु जो भेंट उस पर है, यदि कोई उस की शपथ खाए तो बन्ध जाएगा। हे अन्धों, कौन बड़ा है, भेंट या वेदी: जिस से भेंट पवित्रा होता है? इसलिये जो वेदी की शपथ खाता है, वह उस की, और जो कुछ उस पर है, उस की भी शपथ खाता है। और जो मन्दिर की शपथ खाता है, वह उस की और उस में रहनेवालों की भी शपथ खाता है। और जो स्वर्ग की शपथ खाता है, वह परमेश्वर के सिहांसन की और उस पर बैठनेवाले की भी शपथ खाता है।। हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम पोदीने और सौंफ और जीरे का दसवां अंश देते हो, परन्तु तुम ने व्यवस्था की गम्भीर बातों को छोड़ दिया है; चाहिये था कि इन्हें भी करते रहते, और उन्हें भी न छोड़ते। हे अन्धे अगुवों, तुम मच्छड़ को तो छान डालते हो, परन्तु ऊंट को निगल जाते हो।
Original words (Greek)
- And · G2532καί kaí
- astonished · G1605ἐκπλήσσω ekplḗssō
- at · G1909ἐπί epí
- his · G846αὐτός autós
- doctrine · G1322διδαχή didachḗ
- for · G1063γάρ gár
- he · G2258ἦν ēn
- taught · G1321διδάσκω didáskō
- them · G846αὐτός autós
- as · G5613ὡς hōs
- had · G2192ἔχω échō
- authority · G1849ἐξουσία exousía
- and · G2532καί kaí
- not · G3756οὐ ou
- as · G5613ὡς hōs
- scribes · G1122γραμματεύς grammateús