Proverbs · chapter 5 · verse 7
Proverbs 5:7 in Hindi
इसलिये अब हे मेरे पुत्रों, मेरी सुनो, और मेरी बातों से मुंह न मोड़ो।
Isaliye ab he mere putrom, meree suno, aur meree baatom se munh na modo.
Proverbs 5:7 in English
- King James Version (KJV)
- Hear me now therefore, O ye children, and depart not from the words of my mouth.
- World English Bible (WEB)
- Now therefore, my sons, listen to me. Don’t depart from the words of my mouth.
- American Standard Version (ASV)
- Now therefore, [my] sons, hearken unto me, And depart not from the words of my mouth.
- Bible in Basic English (BBE)
- Give ear to me then, my sons, and do not put away my words from you.
- Darby Translation (DBY)
- And now, children, hearken unto me, and depart not from the words of my mouth.
- Webster's Bible (WBS)
- Hear me now therefore, O ye children, and depart not from the words of my mouth.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And now, ye sons, hearken to me, And turn not from sayings of my mouth.
Read in context
- 5उसके पांव मृत्यु की ओर बढ़ते हैं; और उसके पग अधोलोक तक पहुंचते हैं।।
- 6इसलिये उसे जीवन का समथर पथ नहीं मिल पाता; उसके चालचलन में चंचलता है, परन्तु उसे वह आप नहीं जानती।।
- 7इसलिये अब हे मेरे पुत्रों, मेरी सुनो, और मेरी बातों से मुंह न मोड़ो।
- 8ऐसी स्त्री से दूर ही रह, और उसकी डेवढ़ी के पास भी न जाना;
- 9कहीं ऐसा न हो कि तू अपना यश औरों के हाथ, और अपना जीवन क्रूर जन के वश में कर दे;
Cross references
- Proverbs 4:1 नीतिवचन 4:1हे मेरे पुत्रो, पिता की शिक्षा सुनो, और समझ प्राप्त करने में मन लगाओ।
- Proverbs 7:24 नीतिवचन 7:24अब हे मेरे पुत्रों, मेरी सुनो, और मेरी बातों पर मन लगाओ।
- Proverbs 22:17–21 नीतिवचन 22:17–21कान लगाकर बुद्धिमानों के वचन सुन, और मेरी ज्ञान की बातों की ओर मन लगा; यदि तू उसको अपने मन में रखे, और वे सब तेरे मुंह से निकला भी करें, तो यह मनभावनी बात होगी। मैं आज इसलिये ये बातें तुझ को जता देता हूं, कि तेरा भरोसा यहोवा पर हो। मैं बहुत दिनों से तेरे हित के उपदेश और ज्ञान की बातें लिखता आया हूं, कि मैं तुझे सत्य वचनों का निश्चय करा दूं, जिस से जो तुझे काम में लगाएं, उनको सच्चा उत्तर दे सके।।
- Proverbs 3:21 नीतिवचन 3:21हे मेरे पुत्रा, ये बातें तेरी दृष्टि की ओट न हाने पाएं; खरी बुद्धि और विवेक की रक्षा कर,
- Proverbs 4:21 नीतिवचन 4:21इनको अपनी आंखों की ओट न होने दे; वरन अपने मन में धारण कर।
- Hebrews 12:25 इब्रानियों 12:25सावधान रहो, और उस कहनेवाले से मुंह न फेरो, क्योंकि वे लोग जब पृथ्वी पर के चितावनी देनेवाले से मुंह मोड़कर न बच सके, तो हम स्वर्ग पर से चितावनी करनेवाले से मुंह मोड़कर क्योंकर बच सकेंगे?
- Proverbs 8:32–36 नीतिवचन 8:32–36इसलिये अब हे मेरे पुत्रों, मेरी सुनो; क्या ही धन्य हैं वे जो मेरे मार्ग को पकड़े रहते हैं। शिक्षा को सुनो, और बुद्धिमान हो जाओ, उसके विषय में अनसुनी न करो। क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो मेरी सुनता, वरन मेरी डेवढ़ी पर प्रति दिन खड़ा रहता, और मेरे द्वारों के खंभों के पास दृष्टि लगाए रहता है। क्योंकि जो मुझे पाता है, वह जीवन को पाता है, और यहोवा उस से प्रसन्न होता है। परन्तु जो मेरा अपराध करता है, वह अपने ही पर उपद्रव करता है; जितने मुझ से बैर रखते वे मृत्यु से प्रीति रखते हैं।।