Psalms · chapter 55 · verse 2
Psalm 55:2 in Hindi
मेरी ओर ध्यान देकर, मुझे उत्तर दे; मैं चिन्ता के मारे छटपटाता हूं और व्याकुल रहता हूं।
Meree or dhyaan dekar, mujhe uttar de; maim chintaa ke maare chhatapataataa hoom aur vyaakul rahataa hoon.
Psalm 55:2 in English
- King James Version (KJV)
- Attend unto me, and hear me: I mourn in my complaint, and make a noise;
- World English Bible (WEB)
- Attend to me, and answer me. I am restless in my complaint, and moan
- American Standard Version (ASV)
- Attend unto me, and answer me: I am restless in my complaint, and moan,
- Bible in Basic English (BBE)
- Give thought to me, and let my prayer be answered: I have been made low in sorrow;
- Darby Translation (DBY)
- Attend unto me, and answer me: I wander about in my plaint, and I moan aloud,
- Webster's Bible (WBS)
- Attend to me, and hear me: I mourn in my complaint, and make a noise;
- Young's Literal Translation (YLT)
- Attend to me, and answer me, I mourn in my meditation, and make a noise,
Read in context
- 1हे परमेश्वर, मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा; और मेरी गिड़गिड़ाहट से मुंह न मोड़!
- 2मेरी ओर ध्यान देकर, मुझे उत्तर दे; मैं चिन्ता के मारे छटपटाता हूं और व्याकुल रहता हूं।
- 3क्योंकि शत्रु कोलाहल और दुष्ट उपद्रव कर रहें हैं; वे मुझ पर दोषारोपण करते हैं, और क्रोध में आकर मुझे सताते हैं।।
- 4मेरा मन भीतर ही भीतर संकट में है, और मृत्यु का भय मुझ में समा गया है।
Cross references
- Isaiah 38:14 यशायाह 38:14मैं सूपाबेने वा सारस की नाई च्यूं च्यूं करता, मैं पिण्डुक की नाई विलाप करता हूं। मेरी आंखें ऊपर देखते देखते पत्थरा गई हैं। हे यहोवा, मुझ पर अन्धेर हो रहा है; तू मेरा सहारा हो!
- Psalm 77:3 भजन संहिता 77:3मैं परमेश्वर का स्मरण कर करके कहरता हूं; मैं चिन्ता करते करते मूर्छित हो चला हूं। (सेला)
- Psalm 66:19 भजन संहिता 66:19परन्तु परमेश्वर ने तो सुना है; उस ने मेरी प्रार्थना की ओर ध्यान दिया है।।
- Psalm 64:1 भजन संहिता 64:1हे परमेश्वर, जब मैं तेरी दोहाई दूं, तब मेरी सुन; शत्रु के उपजाए हुए भय के समय मेरे प्राण की रक्षा कर।
- Isaiah 59:11 यशायाह 59:11हम सब के सब रीछों की नाई चिल्लाते हैं और पण्डुकों के समान च्यूं च्यूं करते हैं; हम न्याय की बाट तो जोहते हैं, पर वह कहीं नहीं; और उद्धार की बाट जोहते हैं पर वह हम से दूर ही रहता है।
- Psalm 38:6 भजन संहिता 38:6मैं बहुत दुखी हूं और झूक गया हूं; दिन भर मैं शौक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं।
- Psalm 43:2 भजन संहिता 43:2क्योंकि हे परमेश्वर, तू ही मेरी शरण है, तू ने क्यों मुझे त्याग दिया है? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे शोक का पहिरावा पहिने हुए क्यों फिरता रहूं?
- Psalm 102:9–10 भजन संहिता 102:9–10क्योंकि मैं ने रोटी की नाईं राख खाईं और आंसू मिलाकर पानी पीता हूं। यह तेरे क्रोध और कोप के कारण हुआ है, क्योंकि तू ने मुझे उठाया, और फिर फेंक दिया है।
- Psalm 32:3 भजन संहिता 32:3जब मैं चुप रहा तक दिन भर कहरते कहरते मेरी हडि्डयां पिघल गई।
- Psalm 13:1–2 भजन संहिता 13:1–2हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा? मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?