Psalms · chapter 104 · verse 6
Psalm 104:6 in Hindi
तू ने उसको गहिरे सागर से ढांप दिया है जैसे वस्त्रा से; जल पहाड़ों के ऊपर ठहर गया।
Too ne usako gahire saagar se dhaamp diyaa hai jaise vastraa se; jal pahaadom ke oopar thahar gayaa.
Psalm 104:6 in English
- King James Version (KJV)
- Thou coveredst it with the deep as [with] a garment: the waters stood above the mountains.
- World English Bible (WEB)
- You covered it with the deep as with a cloak. The waters stood above the mountains.
- American Standard Version (ASV)
- Thou coveredst it with the deep as with a vesture; The waters stood above the mountains.
- Bible in Basic English (BBE)
- Covering it with the sea as with a robe: the waters were high over the mountains;
- Darby Translation (DBY)
- Thou hadst covered it with the deep, as with a vesture; the waters stood above the mountains:
- Webster's Bible (WBS)
- Thou coveredst it with the deep as [with] a garment: the waters stood above the mountains.
- Young's Literal Translation (YLT)
- The abyss! as with clothing Thou hast covered it, Above hills do waters stand.
Read in context
- 4जो पवनों को अपने दूत, और धधकती आग को अपने टहलुए बनाता है।।
- 5तू ने पृथ्वी को उसकी नीव पर स्थिर किया है, ताकि वह कभी न डगमगाए।
- 6तू ने उसको गहिरे सागर से ढांप दिया है जैसे वस्त्रा से; जल पहाड़ों के ऊपर ठहर गया।
- 7तेरी घुड़की से वह भाग गया; तेरे गरजने का शब्द सुनते ही, वह उतावली करके बह गया।
- 8वह पहाड़ों पर चढ़ गया, और तराईयों के मार्ग से उस स्थान में उतर गया जिसे तू ने उसके लिये तैयार किया था।
Cross references
- Genesis 7:19 उत्पत्ति 7:19और जल पृथ्वी पर अत्यन्त बढ़ गया, यहां तक कि सारी धरती पर जितने बड़े बड़े पहाड़ थे, सब डूब गए।
- 2 Peter 3:5 2 पतरस 3:5वे तो जान बूझकर यह भूल गए, कि परमेश्वर के वचन के द्वारा से आकाश प्राचीन काल से वर्तमान है और पृथ्वी भी जल में से बनी और जल में स्थिर है।
- Genesis 1:2–10 उत्पत्ति 1:2–10और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था। तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया। और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया। और परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहिला दिन हो गया।। फिर परमेश्वर ने कहा, जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए। तब परमेश्वर ने एक अन्तर करके उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया। और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया।। फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया। और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा; तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उस ने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।