Psalms · chapter 55 · verse 21
Psalm 55:21 in Hindi
उसके मुंह की बातें तो मक्खन सी चिकनी थी परन्तु उसके मन में लड़ाई की बातें थीं; उसके वचन तेल से अधिक नरम तो थे परन्तु नंगी तलवारें थीं।।
Usake munh kee baatem to makkhan see chikanee thee parantu usake man mem ladaaee kee baatem theem; usake vachan tel se adhik naram to the parantu nangee talavaarem theen..
Psalm 55:21 in English
- King James Version (KJV)
- [The words] of his mouth were smoother than butter, but war [was] in his heart: his words were softer than oil, yet [were] they drawn swords.
- World English Bible (WEB)
- His mouth was smooth as butter, but his heart was war. His words were softer than oil, yet they were drawn swords.
- American Standard Version (ASV)
- His mouth was smooth as butter, But his heart was war: His words were softer than oil, Yet were they drawn swords.
- Bible in Basic English (BBE)
- The words of his mouth were smoother than butter, but war was in his heart; his words were softer than oil, but they were sharp swords.
- Darby Translation (DBY)
- Smooth were the milky [words] of his mouth, but his heart was war; his words were softer than oil, yet are they drawn swords.
- Webster's Bible (WBS)
- [The words] of his mouth were smoother than butter, but war [was] in his heart: his words were softer than oil, yet [were] they drawn swords.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Sweeter than honey hath been his mouth, And his heart [is] war! Softer have been his words than oil, And they [are] drawn [swords].
Read in context
- 19ईश्वर जो आदि से विराजमान है यह सुनकर उनको उत्तर देगा। ये वे है जिन में कोई परिवर्तन नहीं और उन में परमेश्वर का भय है ही नहीं।।
- 20उस ने अपने मेल रखनेवालों पर भी हाथ छोड़ा है, उस ने अपनी वाचा को तोड़ दिया है।
- 21उसके मुंह की बातें तो मक्खन सी चिकनी थी परन्तु उसके मन में लड़ाई की बातें थीं; उसके वचन तेल से अधिक नरम तो थे परन्तु नंगी तलवारें थीं।।
- 22अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा।।
- 23परन्तु हे परमेश्वर, तू उन लोगों को विनाश के गड़हे में गिरा देगा; हत्यारे और छली मनुष्य अपनी आधी आयु तक भी जीवित न रहेंगे। परन्तु मैं तुझ पर भरोसा रखे रहूंगा।।
Cross references
- Psalm 57:4 भजन संहिता 57:4मेरा प्राण सिंहों के बीच में है, मुझे जलते हुओं के बीच में लेटना पड़ता है, अर्थात् ऐसे मनुष्यों के बीच में जिन के दांत बर्छी और तीर हैं, और जिनकी जीभ तेज तलवार है।।
- Proverbs 5:3–4 नीतिवचन 5:3–4क्योंकि पराई स्त्री के ओठों से मधु टपकता है, और उसकी बातें तेल से भी अधिक चिकनी होती हैं; परन्तु इसका परिणाम नागदौना सा कडुवा और दोधारी तलवार सा पैना होता है।
- Proverbs 26:28 नीतिवचन 26:28जिस ने किसी को झूठी बातों से घायल किया हो वह उस से बैर रखता है, और चिकनी चुपड़ी बात बोलनेवाला विनाश का कारण होता है।।
- Psalm 28:3 भजन संहिता 28:3उन दुष्टों और अनर्थकारियों के संग मुझे न घसीट; जो अपने पड़ोसियों से बातें तो मेल की बोलते हैं परन्तु हृदय में बुराई रखते हैं।
- Psalm 64:3 भजन संहिता 64:3उन्हों ने अपनी जीभ को तलवार की नाईं तेज किया है, और अपने कड़वे बचनों के तीरों को चढ़ाया है;
- Proverbs 26:24–26 नीतिवचन 26:24–26जो बैरी बात से तो अपने को भोला बनाता है, परन्तु अपने भीतर छल रखता है, उसकी मीठी- मीठी बात प्रतीति न करना, क्योंकि उसके मन में सात घिनौनी वस्तुएं रहती हैं; चाहे उसका बैर छल के कारण छिप भी जाए, तौभी उसकी बुराई सभा के बीच प्रगट हो जाएगी।
- Luke 20:20–21 लूका 20:20–21और वे उस की ताक में लगे और भेदिये भेजे, कि धर्म का भेष धरकर उस की कोई न कोई बात पकड़ें, कि उसे हाकिम के हाथ और अधिकार में सौंप दें। उन्हों ने उस से यह पूछा, कि हे गुरू, हम जानते हैं कि तू ठीक कहता, और सिखाता भी है, और किसी का पक्षपात नहीं करता; बरन परमेश्वर का मार्ग सच्चाई से बताता है।
- Psalm 12:2 भजन संहिता 12:2उन में से प्रत्येक अपने पड़ोसी से झूठी बातें कहता है; वे चापलूसी के ओठों से दो रंगी बातें करते हैं।।
- Proverbs 12:18 नीतिवचन 12:18ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोचविचार का बोलना तलवार की नाई चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं।
- Psalm 62:4 भजन संहिता 62:4सचमुच वे उसको, उसके ऊंचे पद से गिराने की सम्मति करते हैं; वे झूठ से प्रसन्न रहते हैं। मुंह से तो वे आशीर्वाद देते पर मन में कोसते हैं।।
- Matthew 26:25 मत्ती 26:25तब उसके पकड़वानेवाले यहूदा ने कहा कि हे रब्बी, क्या वह मैं हूं?
- Psalm 59:7 भजन संहिता 59:7उनके मुंह के भीतर तलवारें हैं, क्योंकि वे कहते हैं, कौन सुनता है?