Romans · chapter 15 · verse 4
Romans 15:4 in Hindi
जितनी बातें पहिले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्रा शास्त्रा की शान्ति के द्वारा आशा रखें।
Jitanee baatem pahile se likhee gaeem, ve hamaaree hee shikshaa ke liye likhee gaeem haim ki ham dheeraj aur pavitraa shaastraa kee shaanti ke dvaaraa aashaa rakhen.
Romans 15:4 in English
- King James Version (KJV)
- For whatsoever things were written aforetime were written for our learning, that we through patience and comfort of the scriptures might have hope.
- World English Bible (WEB)
- For whatever things were written before were written for our learning, that through perseverance and through encouragement of the Scriptures we might have hope.
- American Standard Version (ASV)
- For whatsoever things were written aforetime were written for our learning, that through patience and through comfort of the scriptures we might have hope.
- Bible in Basic English (BBE)
- Now those things which were put down in writing before our time were for our learning, so that through quiet waiting and through the comfort of the holy Writings we might have hope.
- Darby Translation (DBY)
- For as many things as have been written before have been written for our instruction, that through endurance and through encouragement of the scriptures we might have hope.
- Webster's Bible (WBS)
- For whatever things were written formerly, were written for our learning, that we through patience and comfort of the scriptures might have hope.
- Young's Literal Translation (YLT)
- for, as many things as were written before, for our instruction were written before, that through the endurance, and the exhortation of the Writings, we might have the hope.
Read in context
- 2हम में से हर एक अपने पड़ोसी को उस की भलाई के लिये सुधारने के निमित्त प्रसन्न करे।
- 3क्योंकि मसीह ने अपने आप को प्रसन्न नहीं किया, पर जैसा लिखा है, कि तेरे निन्दकों की निन्दा मुझ पर आ पड़ी।
- 4जितनी बातें पहिले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्रा शास्त्रा की शान्ति के द्वारा आशा रखें।
- 5और धीरज, और शान्ति का दाता परमेश्वर तुम्हें यह बरदान दे, कि मसीह यीशु के अनुसार आपस में एक मन रहो।
- 6ताकि तुम एक मन औश्र एक मुंह होकर हमारे प्रभु यीशु मसीह कि पिता परमेश्वर की बड़ाई करो।
Cross references
- 1 Corinthians 10:11 1 कुरिन्थियों 10:11परन्तु ये सब बातें, जो उन पर पड़ी, दृष्टान्त की रीति पर भी: और वे हमारी चितावनी के लिये जो जगत के अन्तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं।
- 2 Timothy 3:16–17 2 तीमुथियुस 3:16–17हर एक पवित्राशास्त्रा परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्पर हो जाए।।
- Romans 4:23–24 रोमियों 4:23–24और यह वचन, कि विश्वास उसके लिये धार्मिकता गिया गया, न केवल उसी के लिये लिखा गया। बरन हमारे लिये भी जिन के लिये विश्वास धार्मिकता गिना जाएगा, अर्थात् हमारे लिये जो उस पर विश्वास करते हैं, जिस ने हमारे प्रभु यीशु को मरे हुओं में से जिलाया।
- 2 Peter 1:20–21 2 पतरस 1:20–21पर पहिले यह जान लो कि पवित्रा शास्त्रा की कोई भी भविष्यद्वाणी किसी के अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती। क्योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई पर भक्त जन पवित्रा आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्वर की ओर से बोलते थे।।
- Hebrews 10:35–36 इब्रानियों 10:35–36सो अपना हियाव न छोड़ो क्योंकि उसका प्रतिफल बड़ा है। क्योंकि तुम्हें धीरज धरना अवश्य है, ताकि परमेश्वर की इच्छा को पूरी करके तुम प्रतिज्ञा का फल पाओ।
- Romans 12:12 रोमियों 12:12आशा मे आनन्दित रहो; क्लेश मे स्थिर रहो; प्रार्थना मे नित्य लगे रहो।
- 1 Corinthians 9:9–10 1 कुरिन्थियों 9:9–10क्या व्यवस्था भी यही नहीं कहती? क्योंकि मूसा की व्यवस्था में लिखा है कि दांए में चलते हुए बैल का मुंह न बान्धना: क्या परमेश्वर बैलों ही की चिन्ता करता है? या विशेष करके हमारे लिये कहता है। हां, हमारे लिये ही लिखा गया, क्योंकि उचित है, कि जातनेवाला आशा से जोते, और दावनेवाला भागी होने की आशा से दावनी करे।
- Romans 8:24–25 रोमियों 8:24–25आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा? परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जाहते भी हैं।।
- 1 Peter 1:13 1 पतरस 1:13इस कारण अपनी अपनी बुद्धि की कमर बान्धकर, और सचेत रहकर उस अनुग्रह की पूरी आशा रखो, जो यीशु मसीह के प्रगट होने के समय तुम्हें मिलने वाला है।
- Romans 5:3–5 रोमियों 5:3–5केवल यही नहीं, बरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। और आशा से लज्जा नहीं होती, क्योंकि पवित्रा आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।
- James 5:7–11 याकूब 5:7–11सो हे भाइयों, प्रभु के आगमन तक धीरज धरो, देखो, गृहस्थ पृथ्वी के बहुमूल्य फल की आशा रखता हुआ प्रथम और अन्तिम वर्षा होने तक धीरज धरता है। तुम भी धीरज धरो, और अपने हृदय को दृढ़ करो, क्योंकि प्रभु का शुभागमन निकट है। हे भाइयों, एक दूसरे पर दोष न लगाओ ताकि तुम दोषी न ठहरो, देखो, हाकिम द्वार पर खड़ा है। हे भाइयो, जिन भविष्यद्वक्ताओं ने प्रभु के नाम से बातें की, उन्हें दुख उठाने और धीरज धरने का एक आदर्श समझो। देखो, हम धीरज धरने वालों को धन्य कहते हैं: तुम ने अय्यूब के धीरज के विषय में तो सुना ही है, और प्रभु की ओर से जो उसका प्रतिफल हुआ उसे भी जान लिया है, जिस से प्रभु की अत्यन्त करूणा और दया प्रगट होती है।
- Psalm 119:81–83 भजन संहिता 119:81–83मेरा प्राण तेरे उद्धार के लिये बैचेन है; परन्तु मुझे तेरे वचन पर आशा रहती है। मेरी आंखें तेरे वचन के पूरे होने की बाट जोहते जोहते रह गईं है; और मैं कहता हूं कि तू मुझे कब शान्ति देगा? क्योंकि मैं धूएं में की कुप्पी के समान हो गया हूं, तौभी तेरी विधियों को नहीं भूला।
Original words (Greek)
- For · G1063γάρ gár
- things · G3745ὅσος hósos
- written · G4270προγράφω prográphō
- for · G1519εἰς eis
- our · G2251ἡμέτερος hēméteros
- learning · G1319διδασκαλία didaskalía
- that · G2443ἵνα hína
- we · G2192ἔχω échō
- through · G1223διά diá
- patience · G5281ὑπομονή hypomonḗ
- and · G2532καί kaí
- comfort · G3874παράκλησις paráklēsis
- scriptures · G1124γραφή graphḗ
- have · G2192ἔχω échō
- hope · G1680ἐλπίς elpís