1 Corinthians · chapter 14 · verse 34
1 Corinthians 14:34 in Hindi
स्त्रियां कलीसिया की सभा में चुप रहें, क्योंकि उन्हें बातें करने की आज्ञा नहीं, परन्तु आधीन रहने की आज्ञा है: जैसा व्यवस्था में लिखा भी है।
Striyaam kaleesiyaa kee sabhaa mem chup rahem, kyonki unhem baatem karane kee aajnyaa naheem, parantu aadheen rahane kee aajnyaa hai: jaisaa vyavasthaa mem likhaa bhee hai.
1 Corinthians 14:34 in English
- King James Version (KJV)
- Let your women keep silence in the churches: for it is not permitted unto them to speak; but [they are commanded] to be under obedience, as also saith the law.
- World English Bible (WEB)
- Let the wives be quiet in the assemblies, for it has not been permitted for them to be talking except in submission, as the law also says,
- American Standard Version (ASV)
- let the women keep silence in the churches: for it is not permitted unto them to speak; but let them be in subjection, as also saith the law.
- Bible in Basic English (BBE)
- Let women keep quiet in the churches: for it is not right for them to be talking; but let them be under control, as it says in the law.
- Darby Translation (DBY)
- Let [your] women be silent in the assemblies, for it is not permitted to them to speak; but to be in subjection, as the law also says.
- Webster's Bible (WBS)
- Let your women keep silence in the churches; for it is not permitted to them to speak: but [they are commanded] to be under obedience, as also saith the law.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Your women in the assemblies let them be silent, for it hath not been permitted to them to speak, but to be subject, as also the law saith;
Read in context
- 32और भविष्यद्वक्ताओं की आत्मा भविष्यद्वक्ताओं के वश में है।
- 33क्येंकि परमेश्वर गड़बड़ी का नहीं, परन्तु शान्ति का कर्त्ता है; जैसा पवित्रा लोगों की सब कलीसियाओं में है।।
- 34स्त्रियां कलीसिया की सभा में चुप रहें, क्योंकि उन्हें बातें करने की आज्ञा नहीं, परन्तु आधीन रहने की आज्ञा है: जैसा व्यवस्था में लिखा भी है।
- 35और यदि वे कुछ सीखना चाहें, तो घर में अपने अपने पति से पूछें, क्योंकि स्त्री का कलीसिया में बातें करना लज्जा की बात है।
- 36क्यों परमशॆवर का वचन तुम में से निकला? या केवल तुम ही तक पहुंचा है?
Cross references
- 1 Timothy 2:11–12 1 तीमुथियुस 2:11–12और स्त्री को चुपचाप पूरी आधीनता में सीखना चाहिए। और मैं कहता हूं, कि स्त्री न उपदेश करे, और न पुरूष पर आज्ञा चलाए, परन्तु चुपचाप रहे।
- Genesis 3:16 उत्पत्ति 3:16फिर स्त्री से उस ने कहा, मै तेरी पीड़ा और तेरे गर्भवती होने के दु:ख को बहुत बढ़ाऊंगा; तू पीड़ित होकर बालक उत्पन्न करेगी; और तेरी लालसा तेरे पति की ओर होगी, और वह तुझ पर प्रभुता करेगा।
- Numbers 30:3–13 गिनती 30:3–13और जब कोई स्त्री अपनी कुंवारी अवस्था में, अपने पिता के घर से रहते हुए, यहोवा की मन्नत माने, वा अपने को वाचा से बान्धे, तो यदि उसका पिता उसकी मन्नत वा उसका वह वचन सुनकर, जिस से उसने अपने आप को बान्धा हो, उस से कुछ न कहे; तब तो उसकी सब मन्नतें स्थिर बनी रहें, और कोई बन्धन क्यों न हो, जिस से उस ने अपने आप को बान्धा हो, वह भी स्थिर रहे। परन्तु यदि उसका पिता उसकी सुनकर उसी दिन उसको बरजे, तो उसकी मन्नतें वा और प्रकार के बन्धन, जिन से उस ने अपने आप को बान्धा हो, उन में से एक भी स्थिर न रहे, और यहोवा यह जान कर, कि उस स्त्री के पिता ने उसे मना कर दिया है, उसका यह पाप क्षमा करेगा। फिर यदि वह पति के अधीन हो और मन्नत माने, वा बिना सोच विचार किए ऐसा कुछ कहे जिस से वह बन्धन में पड़े, और यदि उसका पति सुनकर उस दिन उससे कुछ न कहे; तब तो उसकी मन्नतें स्थिर रहें, और जिन बन्धनों से उस ने अपने आप को बान्धा हो वह भी स्थिर रहें। परन्तु यदि उसका पति सुनकर उसी दिन उसे मना कर दे, तो जो मन्नत उस ने मानी है, और जो बात बिना सोच विचार किए कहने से उस ने अपने आप को वाचा से बान्धा हो, वह टूट जाएगी; और यहोवा उस स्त्री का पाप क्षमा करेगा। फिर विधवा वा त्यागी हुई स्त्री की मन्नत, वा किसी प्रकार की वाचा का बन्धन क्यों न हो, जिस से उस ने अपने आप को बान्धा हो, तो वह स्थिर ही रहे। फिर यदि कोई स्त्री अपने पति के घर में रहते मन्नत माने, वा शपथ खाकर अपने आप को बान्धे, और उसका पति सुनकर कुछ न कहे, और न उसे मना करे; तब तो उसकी सब मन्नतें स्थिर बनी रहें, और हर एक बन्धन क्यों न हो, जिस से उस ने अपने आप को बान्धा हो, वह स्थिर रहे। परन्तु यदि उसका पति उसकी मन्नत आदि सुनकर उसी दिन पूरी रीति से तोड़ दे, तो उसकी मन्नतें आदि, जो कुछ उसके मुंह से अपने बन्धन के विषय निकला हो, उस में से एक बात भी स्थिर न रहे; उसके पति ने सब तोड़ दिया है; इसलिये यहोवा उस स्त्री का वह पाप क्षमा करेगा। कोई भी मन्नत वा शपथ क्यों न हो, जिस से उस स्त्री ने अपने जीव को दु:ख देने की वाचा बान्धी हो, उसको उसका पति चाहे तो दृढ़ करे, और चाहे तो तोड़े;
- Colossians 3:18 कुलुस्सियों 3:18हे पत्नियो, जेसा प्रभु में उचित है, वैसा ही अपने अपने पति के आधीन रहो।
- 1 Corinthians 14:35 1 कुरिन्थियों 14:35और यदि वे कुछ सीखना चाहें, तो घर में अपने अपने पति से पूछें, क्योंकि स्त्री का कलीसिया में बातें करना लज्जा की बात है।
- Titus 2:5 तीतुस 2:5और संयमी, पतिव्रता, घर का कारबार करनेवाली, भली और अपने अपने पति के आधीन रहनेवाली हों, ताकि परमेश्वर के वचन की निन्दा न होने पाए।
- 1 Corinthians 11:5 1 कुरिन्थियों 11:5परन्तु जो स्त्री उघाड़े सिर प्रार्थना या भविष्यद्ववाणी करती है, वह अपने सिर का अपमान करती है, क्योंकि वह मुण्डी होने के बराबर है।
- 1 Peter 3:1–6 1 पतरस 3:1–6हे पत्नियों, तुम भी अपने पति के आधीन रहो। इसलिये कि यदि इन में से कोई ऐसे हो जो वचन को न मानते हों, तौभी तुम्हारे भय सहित पवित्रा चालचलन को देखकर बिना वचन के अपनी अपनी पत्नी के चालचलन के द्वारा खिंच जाएं। और तुम्हारा सिंगार, दिखावटी न हो, अर्थात् बाल गूंथने, और सोने के गहने, या भांति भांति के कपड़े पहिनना। बरन तुम्हारा छिपा हुआ और गुप्त मनुष्यत्व, नम्रता और मन की दीनता की अविनाशी सजावट से सुसज्जित रहे, क्योंकि परमेश्वर की दृष्टि में इसका मूल्य बड़ा है। और पूर्वकाल में पवित्रा स्त्रियां भी, जो परमेश्वर पर आशा रखती थीं, अपने आप को इसी रीति से संवारती और अपने अपने पति के आधीन रहती थीं। जैसे सारा इब्राहीम की आज्ञा में रहती और उसे स्वामी कहती थी: सो तुम भी यदि भलाई करो, और किसी प्रकार के भय से भयभीत न हो तो उस की बेंटियां ठहरोगी।।
- Ephesians 5:22–24 इफिसियों 5:22–24हे पत्नियों, अपने अपने पति के ऐसे अधीन रहो, जैसे प्रभु के। क्योंकि पति पत्नी का सिर है जैसे कि मसीह कलीसिया का सिर है; और आप ही देह का उद्धारकर्ता है। पर जैसे कलीसिया मसही के आधीन है, वैसे ही पत्नियां भी हर बात में अपने अपने पति के आधीन रहें।
- 1 Corinthians 11:3 1 कुरिन्थियों 11:3सो मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि हर एक पुरूष का सिर मसीह है: और स्त्री का सिर पुरूष है: और मसीह का सिर परमेश्वर है।
- 1 Corinthians 11:7–10 1 कुरिन्थियों 11:7–10हां पुरूष को अपना सिर ढांकना उचित हनीं, क्योंकि वह परमेश्वर का स्वरूप और महिमा है; परन्तु स्त्री पुरूष की महिमा! क्योंकि पुरूष स्त्री से नहीं हुआ, परन्तु स्त्री से हुई है। और पुरूष स्त्री के लिये नहीं सिरजा गया, परन्तु स्त्री पुरूष के लिये सिरजी गई है। इसीलिये स्वर्गदूतों के कारण स्त्री को उचित है, कि अधिकार अपने सिर पर रखे।
- Ephesians 5:33 इफिसियों 5:33पर तुम में से हर एक अपनी पत्नी से अपने समान प्रेम रखे, और पत्नी भी अपने पति का भय माने।।
Original words (Greek)
- your · G5216ὑμῶν hymōn
- women · G1135γυνή gynḗ
- silence · G4601σιγάω sigáō
- in · G1722ἐν en
- churches · G1577ἐκκλησία ekklēsía
- for · G1063γάρ gár
- is · G2010ἐπιτρέπω epitrépō
- not · G3756οὐ ou
- permitted · G2010ἐπιτρέπω epitrépō
- them · G846αὐτός autós
- speak · G2980λαλέω laléō
- but · G235ἀλλά allá
- obedience · G5293ὑποτάσσω hypotássō
- as · G2531καθώς kathṓs
- also · G2532καί kaí
- saith · G3004λέγω légō
- law · G3551νόμος nómos