Mark · chapter 11 · verse 18
Mark 11:18 in Hindi
यह सुनकर महायाजक और शास्त्री उसके नाश करने का अवसर ढूंढ़ने लगे; क्योंकि उस से डरते थे, इसलिये कि सब लोग उसके उपदेश से चकित होते थे।।
Yah sunakar mahaayaajak aur shaastree usake naash karane kaa avasar dhoondhane lage; kyonki us se darate the, isaliye ki sab log usake upadesh se chakit hote the..
Mark 11:18 in English
- King James Version (KJV)
- And the scribes and chief priests heard [it], and sought how they might destroy him: for they feared him, because all the people was astonished at his doctrine.
- World English Bible (WEB)
- The chief priests and the scribes heard it, and sought how they might destroy him. For they feared him, because all the multitude was astonished at his teaching.
- American Standard Version (ASV)
- And the chief priests and the scribes heard it, and sought how they might destroy him: for they feared him, for all the multitude was astonished at his teaching.
- Bible in Basic English (BBE)
- And it came to the ears of the chief priests and scribes, and they took thought how they might put him to death; being in fear of him, because all the people were full of wonder at his teaching.
- Darby Translation (DBY)
- And the chief priests and the scribes heard [it], and they sought how they might destroy him; for they feared him, because all the crowd were astonished at his doctrine.
- Webster's Bible (WBS)
- And the scribes and chief priests heard [it] , and sought how they might destroy him: for they feared him, because all the people were astonished at his doctrine.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And the scribes and the chief priests heard, and they were seeking how they shall destroy him, for they were afraid of him, because all the multitude was astonished at his teaching;
Read in context
- 16और मन्दिर में से होकर किसी को बरतन लेकर आने जाने न दिया।
- 17और उपदेश करके उन से कहा, क्या यह नहीं लिखा है, कि मेरा घर सब जातियों के लिये प्रार्थना का घर कहलाएगा? पर तुम ने इसे डाकुओं की खोह बना दी है।
- 18यह सुनकर महायाजक और शास्त्री उसके नाश करने का अवसर ढूंढ़ने लगे; क्योंकि उस से डरते थे, इसलिये कि सब लोग उसके उपदेश से चकित होते थे।।
- 19और प्रति दिन सांझ होते ही वह नगर से बाहर जाया करता था।
- 20फिर भोर को जब वे उधर से जाते थे तो उन्हों ने उस अंजीर के पेड़ को जड़ तक सूखा हुआ देखा।
Cross references
- Matthew 7:28 मत्ती 7:28जब यीशु ये बातें कह चुका, तो ऐसा हुआ कि भीड़ उसके उपदेश से चकित हुई।
- Mark 12:12 मरकुस 12:12तब उन्हों ने उसे पकड़ना चाहा; क्योंकि समझ गए थे, कि उस ने हमारे विरोध में यह दृष्टान्त कहा है: पर वे लोगों से डरे; और उसे छोड़ कर चले गए।।
- John 11:53–57 यूहन्ना 11:53–57सो उसी दिन से वे उसके मार डालने की सम्मति करने लगे।। इसलिये यीशु उस समय से यहूदियों में प्रगट होकर न फिरा; परन्तु वहां से जंगल के निकट के देख में इफ्राईम नाम, एक नगर को चला गया; और अपने चेलों के साथ वहीं रहने लगा। और यहूदियों का फसह निकट था, और बहुतेरे लोग फसह से पहिले दिहात से यरूशलेम को गए कि अपने आप को शुद्ध करें। सो वे यीशु को ढूंढ़ने और मन्दिर में खड़े होकर आपस में कहने लगे, तुम क्या समझते हो? क्या वह पर्ब्ब में नहीं आएगा? और महायाजकों और फरीसियों ने भी आज्ञा दे रखी थी, कि यदि कोई यह जाने कि यीशु कहां है तो बताए, कि उसे पकड़ लें।।
- Acts 24:25 प्रेरितों के काम 24:25और जब वह धर्म और संयम और आनेवाले न्याय की चर्चा करता था, तो फेलिक्स ने भयमान होकर उत्तर दिया, कि अभी तो जा: अवसर पाकर मैं तुझे फिर बुलाऊंगा।
- Mark 11:32 मरकुस 11:32और यदि हम कहें, मनुष्यों की ओर से तो लोगों का डर है, क्योंकि सब जानते हैं कि यूहन्ना सचमुच भविष्यद्वक्ता है।
- Mark 1:22 मरकुस 1:22और लोग उसके उपदेश से चकित हुए; क्योंकि वह उन्हें शास्त्रियों की नाईं नहीं, परन्तु अधिकारी की नाई उपदेश देता था।
- Luke 4:22 लूका 4:22और सब ने उसे सराहा, और जो अनुग्रह की बातें उसके मुंह से निकलती थीें, उन से अचम्भा किया; और कहने लगे; क्या यह यूसुफ का पुत्रा नहीं?
- Mark 14:1–2 मरकुस 14:1–2दो दिन के बाद फसह और अखमीरी रोटी का पर्व्व होनेवाला था: और महायाजक और शास्त्री इस बात की खोज में थे कि उसे क्योंकर छल से पकड़ कर मार डालें। परन्तु कहते थे, कि पर्व्व के दिन नहीं, कहीं ऐसा न हो कि लोगों मे बलवा मचे।।
- Mark 3:6 मरकुस 3:6तब फरीसी बाहर जाकर तुरन्त हेरोदियों के साथ उसके विरोध में सम्मति करने लगे, कि उसे किस प्रकार नाश करें।।
- Revelation 11:5–10 प्रकाशितवाक्य 11:5–10और यदि कोई उन को हानि पहुंचाना चाहता है, तो उन के मुंह से आग निकलकर उन के बैरियों को भस्म करती है, और यदि कोई उन को हानि पहुंचाना चाहेगा, तो अवश्य इसी रीति से मार डाला जाएगा। इन्हें अधिकार है, कि आकाश को बन्द करें, कि उन की भविष्यद्ववाणी के दिनों में मेंह न बरसे, और उन्हें सब पानी पर अधिकार है, कि उसे लोहू बनाएं, और जब जब चाहें तब तब पृथ्वी पर हर प्रकार की आपत्ति लाएं। और जब वे अपनी गवाही दे चुकेंगे, तो वह पशु जो अथाह कुण्ड में से निकलेगा, उन से लड़कर उन्हें जीतेगा और उन्हें मार डालेगा। और उन की लोथें उस बड़े नगर के चौक में पड़ी रहेंगी, जो आत्मिक रीति से सदोम और मिसर कहलाता है, जहां उन का प्रभु भी क्रूस पर चढ़ाया गया था। और सब लोगों, और कुलों, और भाषाओं, और जातियों में से लोग उन की लोथें साढ़े तीन दिन तक देखते रहेंगे, और उन की लोथें कब्र में रखने ने देंगे। और पृथ्वी के रहनेवाले, उन के मरने से आनन्दित और मगन होंगे, और एक दूसरे के पास भेंट भेजेंगे, क्योंकि इन दोनों भविष्यद्वक्ताओं ने पृथ्वी के रहनेवालों को सताया था
- Mark 6:20 मरकुस 6:20क्योंकि हेरोदेस यूहन्ना को धर्मी और पवित्रा पुरूष जानकर उस से डरता था, और उसे बचाए रखता था, और उस की सुनकर बहुत घबराता था, पर आनन्द से सुनता था।
- 1 Kings 22:18 1 राजा 22:18तब इस्राएल के राजा ने यहोशापात से कहा, क्या मैं ने तुझ से न कहा था, कि वह मेरे विषय कल्याण की नहीं हानि ही की भविष्यद्वाणी करेगा।
Original words (Greek)
- And · G2532καί kaí
- scribes · G1122γραμματεύς grammateús
- and · G2532καί kaí
- priests · G749ἀρχιερεύς archiereús
- heard · G191ἀκούω akoúō
- and · G2532καί kaí
- sought · G2212ζητέω zētéō
- how · G4459πῶς pōs
- destroy · G622ἀπόλλυμι apóllymi
- him · G846αὐτός autós
- for · G1063γάρ gár
- feared · G5399φοβέω phobéō
- him · G846αὐτός autós
- because · G3754ὅτι hóti
- all · G3956πᾶς pâs
- people · G3793ὄχλος óchlos
- astonished · G1605ἐκπλήσσω ekplḗssō
- at · G1909ἐπί epí
- his · G846αὐτός autós
- doctrine · G1322διδαχή didachḗ