Psalms · chapter 30 · verse 7
Psalm 30:7 in Hindi
हे यहोवा अपनी प्रसन्नता से तू ने मेरे पहाड़ को दृढ़ और स्थिर किया था; जब तू ने अपना मुख फेर लिया तब मैं घबरा गया।।
He yahovaa apanee prasannataa se too ne mere pahaad ko drudh aur sthir kiyaa thaa; jab too ne apanaa mukh pher liyaa tab maim ghabaraa gayaa..
Psalm 30:7 in English
- King James Version (KJV)
- LORD, by thy favour thou hast made my mountain to stand strong: thou didst hide thy face, [and] I was troubled.
- World English Bible (WEB)
- You, LORD, when you favored me, made my mountain stand strong; but when you hid your face, I was troubled.
- American Standard Version (ASV)
- Thou, Jehovah, of thy favor hadst made my mountain to stand strong: Thou didst hide thy face; I was troubled.
- Bible in Basic English (BBE)
- Lord, by your grace you have kept my mountain strong: when your face was turned from me I was troubled.
- Darby Translation (DBY)
- Jehovah, by thy favour thou hadst made my mountain to stand strong: thou didst hide thy face; I was troubled.
- Webster's Bible (WBS)
- LORD, by thy favor thou hast made my mountain to stand strong: thou didst hide thy face, [and] I was troubled.
- Young's Literal Translation (YLT)
- O Jehovah, in Thy good pleasure, Thou hast caused strength to remain for my mountain,' Thou hast hidden Thy face — I have been troubled.
Read in context
- 5क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सबेरे आनन्द पहुंचेगा।।
- 6मैं ने तो चैन के समय कहा था, कि मैं कभी नहीं टलने का।
- 7हे यहोवा अपनी प्रसन्नता से तू ने मेरे पहाड़ को दृढ़ और स्थिर किया था; जब तू ने अपना मुख फेर लिया तब मैं घबरा गया।।
- 8हे यहोवा मैं ने तुझी को पुकारा; और यहोवा से गिड़गिड़ाकर यह बिनती की, कि
- 9जब मैं कब्र में चला जाऊंगा तब मेरे लोहू से क्या लाभ होगा? क्या मिट्टी तेरा धन्यवाद कर सकती है? क्या वह तेरी सच्चाई का प्रचार कर सकती है?
Cross references
- Psalm 104:29 भजन संहिता 104:29तू मुख फेर लेता है, और वे घबरा जाते हैं; तू उनकी सांस ले लेता है, और उनके प्राण छूट जाते हैं और मिट्टी में फिर मिल जाते हैं।
- Psalm 143:7 भजन संहिता 143:7हे यहोवा, फुर्ती करके मेरी सुन ले; क्योंकि मेरे प्राण निकलने ही पर हैं मुझ से अपना मुंह न छिपा, ऐसा न हो कि मैं कबर में पड़े हुओं के समान हो जाऊं।
- Psalm 30:5 भजन संहिता 30:5क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सबेरे आनन्द पहुंचेगा।।
- Deuteronomy 31:17 व्यवस्थाविवरण 31:17उस समय मेरा कोप इन पर भड़केगा, और मैं भी इन्हें त्यागकर इन से अपना मुंह छिपा लूंगा, और ये आहार हो जाएंगे; और बहुत सी विपत्तियां और क्लेश इन पर आ पड़ेंगे, यहां तक कि ये उस समय कहेंगे, क्या ये विपत्तियां हम पर इस कारण तो नहीं आ पड़ीं, क्योंकि हमारा परमेश्वर हमारे मध्य में नहीं रहा?
- Job 10:12 अय्यूब 10:12तू ने मुझे जीवन दिया, और मुझ पर करूणा की है; और तेरी चौकसी से मेरे प्राण की रक्षा हई है।
- Psalm 89:17 भजन संहिता 89:17क्योंकि तू उनके बल की शोभा है, और अपनी प्रसन्नता से हमारे सींग को ऊंचा करेगा।
- Psalm 40:2 भजन संहिता 40:2उस ने मुझे सत्यानाश के गड़हे और दलदल की कीच में से उबारा, और मुझ को चट्टान पर खड़ा करके मेरे पैरों को दृढ़ किया है।
- Psalm 5:12 भजन संहिता 5:12क्योंकि तू धर्मी को आशिष देगा; हे यहोवा, तू उसको अपने अनुग्रहरूपी ढाल से घेरे रहेगा॥
- 1 Chronicles 17:26–27 1 इतिहास 17:26–27और अब हे यहोवा तू ही परमेश्वर है, और तू ने अपने दास को यह भलाई करने का वचन दिया है। और अब तू ने प्रसन्न हो कर, अपने दास के घराने पर ऐसी आशीष दी है, कि वह तेरे सम्मुख सदैव बना रहे, क्योंकि हे यहोवा, तू आशीष दे चुका है, इसलिये वह सदैव आशीषित बना रहे।
- Isaiah 38:17 यशायाह 38:17देख, शान्ति ही के लिये मुझे बड़ी कडुआहट मिली; परन्तु तू ने स्नेह करके मुझे विनाश के गड़हे से निकाला है, क्योंकि मेरे सब पापों को तू ने अपनी पीठ के पीछे फेंक दिया है।
- Psalm 44:3 भजन संहिता 44:3क्योंकि वे न तो अपनी तलवार के बल से इस देश के अधिकारी हुए, और न अपने बाहुबल से; परन्तु तेरे दहिने हाथ और तेरी भुजा और तेरे प्रसन्न मुख के कारण जयवन्त हुए; क्योंकि तू उनको चाहता था।।
- Job 30:26–31 अय्यूब 30:26–31जब मैं कुशल का मार्ग जोहता था, तब विपत्ति आ पड़ी; और जब मैं उजियाले का आसरा लगाए था, तब अन्धकार छा गया। मेरी अन्तडिय़ां निरन्तर उबलती रहती हैं और आराम नहीं पातीं; मेरे दु:ख के दिन आ गए हैं। मैं शोक का पहिरावा पहिने हुए मानो बिना सूर्य की गमीं के काला हो गया हूँ। और सभा में खड़ा हो कर सहायता के लिये दोहाई देता हूँ। मैं गीदड़ों का भाई और शुतुर्मुर्गों का संगी हो गया हूँ। मेरा चमड़ा काला हो कर मुझ पर से गिरता जाता है, और तप के मारे मेरी हड्डियां जल गई हैं। इस कारण मेरी वीणा से विलाप और मेरी बांसुरी से रोने की ध्वनि निकलती है।